पुंछ। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सोमवार को पुंछ जिले में बायोमीट्रिक उपस्थिति पर शिक्षकों की कठिनाई को उजागर किया।
इस दौरान संगठन के जिला अध्यक्ष जीवन प्रकाश ने कहा कि पुंछ जिले में बड़ी संख्या में शिक्षक स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीन की विफलता के कारण अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई मशीनें या तो पुरानी हो चुकी हैं या बार-बार तकनीकी समस्याओं का सामना कर रही हैं। यह शिक्षक समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गया है। अधिकांश स्कूलों में बायोमीट्रिक डिवाइस अब ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए स्थिति कठिन हो गई है क्योंकि इनमें से कई उपकरणों को शुरू में उन्होंने अपनी जेब से खरीदा था या सीमित स्कूल फंड के जरिए व्यवस्थित किया था। अब एक बार फिर शिक्षकों को बिना किसी सरकारी सहायता के नए उपकरणों की व्यवस्था करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक बायोमीट्रिक मशीन की कीमत 20 हजार से 30 हजार रुपये के बीच है। पुरानी मशीनों की मरम्मत में भी पांच हजार रुपये से अधिक का खर्च आता है, जिसका भुगतान स्कूलों को अपने स्थानीय कोष से करना पड़ता है। जिला अध्यक्ष जीवन प्रकाश ने कहा कि अगर बायोमीट्रिक उपस्थिति अनिवार्य है तो सरकार को इसके लिए धन मुहैया कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सत्यापन ही लक्ष्य है तो सरकार को स्कूलों को जीपीएस लोकेशन सुविधाओं के साथ मोबाइल-आधारित बायोमीट्रिक एप का उपयोग करने की अनुमति देनी चाहिए। उन्होंने इस मामले को जल्द से जल्द हल करने के लिए शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू से व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने का आह्वान किया है।