अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर की जीवनदायिनी सूर्यपुत्री तवी नदी में चार प्रमुख बड़े नालों का गंद गिर रहा है। प्रशासन की ओर से गंदा पानी तवी में गिरने से रोकने के लिए 2012 से प्रयास किए जा रहे हैं। करीब 10 करोड़ की लागत से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजना तैयार हो चुकी है। 90 दिन के अंदर टेंडर प्रक्रिया पूरी की जानी है। इसके बाद सभी नालों को ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ दिया जाएगा। हालांकि पूरी प्रक्रिया में छह से आठ महीने लग जाएंगे।
जम्मू को मंदिरों का शहर कहा जाता है, लेकिन अधिकतर हिस्से अब भी सीवरेज व्यवस्था से वंचित हैं। सीवरेज नहीं होने के कारण घरों सहित अन्य स्थानों पर शौचालयों की गंदगी नालों से होते तवी नदी में पहुंच रही है। नगरोटा से निक्की तवी क्षेत्र तक 25 छोटे-बड़े नाले चार बड़े नालों में समाहित होकर तवी नदी में गिर रहे हैं। गंदे पानी को गिरने से रोकने के लिए करीब 12 साल से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब तवी रिवर फ्रंट के निर्माण कार्य के साथ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का खाका तैयार हो गया है। तीन महीने में 10 करोड़ की टेंडर प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद सभी नालों को सीवरेज प्लांट से जोड़ा जाएगा।
सिंचाई के कार्यों में प्रयुक्त होगा पानी
शहर के नालों का गंदा पानी ट्रीटमेंट प्लांट में साफ होने के बाद एक कैचमेंट एरिया में एकत्रित किया जाएगा। पानी को खेतों की सिंचाई एवं निर्माण कार्यों में प्रयोग किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा पाइपलाइन डाली जाएगी। वहीं, शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए कई प्राेजेक्ट शुरू हैं। सरकार की ओर से तवी रिवर फ्रंट को साबरमती की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। बरसात के दौरान जलभराव को देखते कासिम नगर, राजीव नगर, प्रेम नगर, राजेंद्र नगर, कृष्णा नगर के नालों को पक्का बनाया गया, लेकिन यह अब भी तवी में मिल रहे हैं।
तवी रिवर के कैचमेंट एरिया में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर टेंडर अलॉटमेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी है। तीन महीने के बाद प्लांट का निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
-राहुल यादव, कमिश्नर एवं सीईओ स्मार्ट सिटी