दीपावली के दूसरे दिन लगने वाला खंडग्रास सूर्यग्रहण ग्रस्तास्त सूर्यग्रहण के रूप में नजर आएगा। आज यानि 25 अक्तूबर को साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगेगा। सूर्यास्त होने के कारण ग्रहण का मोक्ष भार में दृश्यमान नहीं होगा। ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले ही लग जाएगा। जम्मू में 4 बजकर 14 मिनट पर शुरू होगा और 5 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगा।
जम्मू कश्मीर में सूर्य ग्रहण का समय
मौसम विभाग श्रीनगर के उप निदेशक मुख्तार अहमद ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में आज आंशिक सूर्य ग्रहण लगेगा। जम्मू कश्मीर में सूर्य ग्रहण मंगलवार शाम करीब 4:15 बजे शुरू होगा और शाम 5:45 बजे तक रहेगा।
ग्रहण के समय सूर्य को सीधे न देखने की सलाह
उन्होंने यह भी कहा कि सूर्यास्त के बाद ग्रहण हट जाएगा। उन्होंने विभिन्न एजेंसियों की सलाह के अनुसार लोगों को ग्रहण अवधि के दौरान सूर्य की ओर सीधे नहीं देखने का सुझाव दिया। वहीं, भारत के अन्य हिस्सों में सूर्य ग्रहण 2:30 बजे शुरू होगा और सूर्यास्त के तुरंत बाद शाम 6:30 बजे समाप्त होगा।
ज्योतिष के अनुसार सूतक काल में भोजन तथा पेय पदार्थों के सेवन की मनाही की गई है तथा देव दर्शन भी वर्जित माना गया है। आज शाम जैसे ही सूर्यास्त होगा उसके चंद घंटों पहले देश में साल का आखिरी आंशिक सूर्य ग्रहण देखने को मिलेगा। दिवाली के दूसरे दिन लगने वाला सूर्य ग्रहण तुला राशि में लगेगा।
27 साल बाद दिवाली पर सूर्य ग्रहण
कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दिवाली मनाई जाती है। इस साल अमावस्या तिथि पर साल का दूसरा व आखिरी सूर्यग्रहण लग रहा है। हालांकि यह सूर्यग्रहण अमावस्या तिथि के समाप्त होने पर लग रहा है। दिवाली पर सूर्यग्रहण का ऐसा संयोग करीब 27 साल पहले 1995 में बना था। सूर्य ग्रहण के समय सूर्य के साथ चंद्रमा, शुक्र और केतु रहेंगे। इन ग्रहों पर राहु की सीधी नजर रहेगी।
इन नियमों का कर सकते हैं पालन
- सूतक काल में न ही भोजन बनाया जाता है और न ही ग्रहण किया जाता। हालांकि बीमार, वृद्ध और गर्भवती महिलाओं के लिए इस तरह के नियम लागू नहीं हैं।
- यदि भोजन पहले से बना रखा है तो उसमें तुलसी का पत्ता तोड़कर डाल दें। दूध और इससे बनी चीजों, पानी में भी तुलसी का पत्ता डालें। तुलसी के पत्ते के कारण दूषित वातावरण का प्रभाव खाद्य वस्तुओं पर नहीं पड़ता।
- सूतक लगने के साथ गर्भवती महिलाएं विशेष रूप से ध्यान रखें। सूतक काल से लेकर ग्रहण पूरा होने तक घर से न निकलें और अपने पेट के हिस्से पर गेरू लगाकर रखें।
- सूतक काल से ग्रहण काल समाप्त होने तक गर्भवती स्त्रियां किसी भी प्रकार की नुकीली वस्तुओं का इस्तेमाल न करें।
- सूतक काल में घर के मंदिर में भी पूजा पाठ न करें। इसके स्थान पर मानसिक जाप करना फलदायी रहेगा।