संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नटरंग ने रविवार को साप्ताहिक संडे थिएटर के तहत नटरंग स्टूडियो कच्ची छावनी में नाटक रिहर्सल का मंचन हुआ। लक्ष्मी कांत वैष्णव द्वारा लिखित और नीरज कांत द्वारा निर्देशित हिंदी नाटक में लेखक ने उन लोगों पर व्यंग्य किया है जो अनुचित ज्ञान तथा बुनियादी योग्यताओं के अभाव में भी कुछ करना चाहते हैं। समाज में उन महिलाओं के व्यवहार और इच्छाओं पर तीखी टिप्पणी की गई है, जिनके पति उच्च पदों पर आसीन हैं। नाटक में दिखाया कि सभी कलाकार महिलाएं (किटी-मेट्स) अच्छा शो प्रस्तुत करना चाहती हैं, लेकिन उनका दृष्टिकोण अपरिपक्व है। एक पेशेवर थिएटर निर्माण के लिए जिन बुनियादी तत्वों (अनुशासन, समय की पाबंदी, टीम भावना, आत्म-प्रेरणा, मन की तटस्थता) की आवश्यकता होती है, वे इनमें गायब थे। केवल ईर्ष्या, गपशप, समन्वय की कमी और अहंकार जैसे अवगुण थे।
निर्देशक सीमाओं और क्षमता की कमी के कारण टीम को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं है। महिलाओं को साथियों के प्रति दयाभाव से काम करने की आवश्यकता थी, पर उनकी सनक के आगे यह कमजोर पड़ गई। इनमें से कुछ के मन में इस बात पर गर्व भी था कि उनके पति समाज में अलग रुतबा रखते हैं, जिसके परिणामस्वरूप वे लाड़-प्यार वाले व्यवहार की तलाश करती हैं। रिहर्सल एक सख्त संदेश छोड़ गया कि सार्थक काम के लिए अनुशासित और प्रतिबद्ध होने की आवश्यकता है।
कलाकारों में वृंदा गुजराल, मानवी भूषण, सांची दत्ता, सानवी आनंद, महक चिब, रीत सेठी, गन सेठी, श्रनया महाजन और प्रियल गुप्ता शामिल थे। लाइट संचालन नीरज कांत ने किया। प्रस्तुतियां महीक्षित सिंह द्वारा की गईं और शो का संचालन मोहम्मद यासीन ने किया।