अमर उजाला ब्यूरो जम्मू। कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के बीच छात्र-छात्राएं अब भविष्य को लेकर चिंतित नजर आने लगे हैं। लॉकडाउन के चलते स्कूल से लेकर कॉलेज और यहां तक की कोचिंग संस्थान सब कुछ बंद है। अगले सत्र में दाखिले की प्रक्रिया कब से शुरू होगी, यह तय नहीं हो पा रहा है। खासकर विज्ञान के वैसे छात्र जो परीक्षाफल के बाद ही मेडिकल व इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए दूसरे राज्यों में कोचिंग संस्थानों में जाने की तैयारी में थे वे सभी अब घर बैठे हैं। वहीं कुछ विद्यार्थी कालेजों में दाखिले लेने के बारे में सोच-विचार कर चिंतित हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि हमेशा भविष्य की चिंता लगी रहती है कि आगे चलकर क्या होगा। हालांकि, कुछ सुविधा संपन्न छात्र-छात्राएं ऐसे भी हैं जो ऑनलाइन तैयारी में जुटे हैं। लेकिन डॉ. व इंजीनियर बनने का सपना पाने वाले कई ऐसे मेधावी बच्चे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं वैसे बच्चों पर लॉक डाउन का प्रभावकारी असर है। बहुत से छात्र-छात्राएं ऐसे भी हैं जो कंप्यूटर के क्षेत्र में पढ़ाई कर अपनी जिंदगी संवारना चाहते हैं। कंप्यूटर की ट्रेनिंग देने वाले संस्थान भी बंद हैं। कला संकाय व कॉमर्स संकाय के मेधावी बच्चे भी भविष्य को ले चिंतित हैं। इस समय विद्यार्थियों को सबसे ज्यादा चिंता है कि वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करें तो पर परीक्षा होगी कब। इस समय सबसे ज्यादा परेशानी आ रही है सोच विचार करने पर। 12वीं कक्षा के नॉन मेडिकल के विद्यार्थी उत्कर्ष सिंह ने बताया कि वह जेईई की तैयारी कर रहे हैं और उन्होंने पूरी तैयारी परीक्षा की तीथि की हिसाब से की थी। पर कोरोना वायरस के चलते सबकुछ खराब हो गया। पढ़ाई तो अभी भी कर रहे हैं पर मन में अजीब सी चिंता लगी रहती है कि परीक्षा कब होगी। वहीं कक्षा 12वीं की कार्मस की वंशिका का कहना है कि वह परीक्षा खत्म होते ही प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग के लिए बाहर जाने की सोच रही थी पर लॉकडाउन के चलते सब प्लान खराब हो गया। ऑनलाइन भी 2जी के माध्यम से इतने अच्छे से कोई क्लास नहीं पड़ सकते हैं, ऐसे में करें भी तो क्या करें।