जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर स्थित डल झील में सरस आजीविका मेले का आयोजित किया गया है। 15 मार्च से शुरू हुआ मेला 25 मार्च तक जारी रहेगा। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से कारीगर अपनी पारम्परिक हस्तकला और हस्तशिल्प को प्रदर्शित कर रहे हैं।
सोमवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मेले में शिकरत की। इस दौरान उपराज्यपाल ने कहा कि सरस आजीविका मेला ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों और कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए उत्कृष्ट मंच प्रदान कर रहा है। इससे खरीदारों के साथ संबंध विकसित करने और डिजाइन, पैकेजिंग में सहयोग मिल रहा है।
उन्होंने कहा, 'स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेश शासन ने महिला उद्यमियों को अपने व्यवसाय को बढ़ाने और वैश्विक बाजार से जुड़ने के अवसर प्रदान करने में मदद करने के लिए कई पहलें की हैं।'
उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में 6 लाख 27 हजार महिलाएं 78,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़े हैं। इससे रोजगार सृजित हो रहा है और महिलाओं के उद्यमी बनने का सपना भी साकार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश शासन ने हर क्षेत्र में महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए हैं और उन्हें विकसित और आत्मनिर्भर जम्मू-कश्मीर के लक्ष्य को साकार करने में समान भागीदार बनाने में सक्षम बनाया है।
उपराज्यपाल ने ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग और जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन को ग्रामीण महिलाओं की आजीविका हासिल करने और उन्हें उनकी उद्यमशीलता की यात्रा के लिए उचित प्रशिक्षण और अन्य सहायता देने के प्रयासों के लिए बधाई दी। उपराज्यपाल ने जम्मू कश्मीर में महिलाओं के जीवन पर अधिक प्रभाव डालने वाले सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों और योजनाओं पर प्रकाश डाला।