सरकार के इस फैसले से स्थानीय लोगों में उत्साह, कहा-अब वह आर्थिक रूप से हो सकेंगे सशक्त
अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। घाटी में कुछ समय से सीमा पर्यटन के फलने-फूलने के साथ प्रशासन ने केरन को एक सीमावर्ती पर्यटक गांव के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। जम्मू-कश्मीर के अंतरिम बजट 2024-25 के अनुसार सरकार 20 ऑफ-बीट पर्यटन स्थलों में बुनियादी ढांचे और बुनियादी सुविधाओं को विकसित करेगी। इनमें से जम्मू और कश्मीर डिवीजन में 10-10 स्थान हैं।
अंतरिम बजट में कहा गया है कि केरन, जिसे हाल ही में पर्यटकों के लिए खोला गया है, को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के सीमावर्ती पर्यटक गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। एक सीमावर्ती पर्यटक गांव के रूप में केरन के विकास की पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने सराहना की है, जिन्होंने कहा कि गांव में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की बहुत बड़ी गुंजाइश है। टूर एंड ट्रेवल ऑपरेटर गुलाम मुस्तफा ने कहा कि केरन एक खूबसूरत जगह है और पिछले दो वर्षों के दौरान इसने पर्यटकों को सफलतापूर्वक आकर्षित किया है। केरन को एक सीमावर्ती पर्यटक गांव के रूप में विकसित करने से, गांव में बुनियादी ढांचा विकसित होगा, जिसमें पर्यटकों के लिए होमस्टे और अन्य सुविधाएं शामिल होंगी। केरन और तंगधार के सीमावर्ती क्षेत्रों में तत्काल विकास की आवश्यकता है।
किशनगंगा नदी के किनारे बसा कुपवाड़ा जिले की एक सीमावर्ती तहसील केरन एक ऑपबीट क्षेत्र है। कई दशकों से सीमा पार व्याप्त तनाव के कारण पर्यटन को बढ़ावा नहीं दिया गया। केरन, गुरेज़, तंगधार, मच्छिल और बंगस जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों को पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया। स्थानीय लोग इस फैसले से खुश हैं क्योंकि यह क्षेत्र में समृद्धि और आर्थिक विकास का वादा करता है। गौरतलब है कि अंतरिम बजट की प्रति के अनुसार, सरकार तोसा मैदान और सीता हरण सर्किट भी विकसित करने जा रही है। इसमें कहा गया है कि 75 चिन्हित विरासत स्थलों, सांस्कृतिक स्थलों का पुनरुद्धार और जीर्णोद्धार भी पूरा किया जाएगा।