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Jammu News: नौरोज पर लीच थैरेपी के लिए लोगों में दिखा उत्साह

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अमर उजाला ब्यूरो
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श्रीनगर। घाटी में नौरोज पर लोगों में लीच थेरेपी के प्रति काफी उत्साह दिखाई दिया। लोग इसको शुभ मानते हैं। उनका कहना है कि यह इलाज उनके पैगंबरों के समय से चलता आ रहा है। आधुनिकता के युग में ही यह थैरेपी घाटी में जिंदा है।

नौरोज पारसी कैलेंडर के अनुसार साल का पहला दिन होता है, लेकिन इसे कश्मीर में एक अलग ही महत्व हासिल है। इस दिन को जहां बहार की शुरुआत का पहला दिन माना जाता है, वहीं मुस्लिम समुदाय के लोग इसे खुदा की दी गई चीजों के शुक्राने के तौर पर भी मनाते हैं। आज के दिन भारी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग श्रीनगर की हज़रतबल दरगाह जाकर विशेष मजलिस में भाग लेकर विशेष दुआएं करते हैं और पौधे भी लगाते हैं। गौरतलब है कि न सिर्फ दरगाह के बाहर बल्कि अब इस इलाज को कश्मीर में यूनानी अस्पतालों में भी किया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि इस थेरेपी से गंदा खून शरीर से बाहर निकल जाता है और कई बीमारियों से छुटकारा भी मिलता है जिनमें ह्रदय सम्बंधित, स्किन प्रॉब्लम, आर्थराइटिस, हेपेटाइटिस, ब्लड प्रेशर, थायराइड, आदि जैसी बीमारियां शामिल हैं।
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लोग बोले इस इलाज से साफ होता है खून
दरगाह के बाहर कई लोग लीच थैरेपी करवाते नजर आते हैं। जाहिदा बानो नामक युवती ने बताया कि वह 4 सालों से नौरोज के दिन दरगाह में आकर लीच थैरेपी करवाती हैं। उन्हें स्किन प्रॉब्लम थी, लेकिन जब से उन्होंने इस थैरेपी को अपनाया है, तब से उन्हें आराम मिलना शुरू हुआ है। दरगाह हजरतबल के बाहर पिछले करीब 30 साल से लोगों का इलाज कर रहे मोहम्मद रमजान ने बताया कि यह इलाज का एक पारंपरिक तरीका है। हम एक लीच (जोंक) को मरीज की त्वचा पर उस जगह रखते हैं जहां हलकी सूजन हो और कुछ देर बाद जब वह जोंक गंदा खून चूसकर भर जाती है वो स्वयं गिर जाती है। इस थैरेपी से न सिर्फ इंसान के शरीर में जमा हुए टॉक्सिन निकल जाते हैं वहीं गंदा खून भी साफ हो जाता है।
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