किश्तवाड़ जिले में ऑपरेशन त्राशी के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर सैफुल्लाह और उसके दो साथियों के खात्मे में अहम भूमिका निभाने वाला सेना का जर्मन शेफर्ड टायसन अब तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
सेना के अधिकारियों ने बताया कि टायसन ने आतंकियों के ठिकाने में प्रवेश करते समय पहली गोली खुद झेली, फिर भी बिना डरे आगे बढ़कर आतंकियों पर हमला किया। उसकी बहादुरी के कारण सेना, पुलिस और सीआरपीएफ के जवान आतंकियों को ठीक से निशाना बनाने और उन्हें ढेर करने में सफल रहे।
व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने कहा, जख्मी होने के बावजूद टायसन हौसले से भरा हुआ है और अपनी ड्यूटी के प्रति निष्ठा का उदाहरण पेश करता है। वह हर मायने में एक सच्चा योद्धा है।
टायसन की एक फ्रंट लेग में चोट लगी थी, जिसे बाद में हेलीकॉप्टर से निकालकर वेटरनरी अस्पताल में भर्ती कराया गया। कॉर्प्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, लें. जनरल पी.के. मिश्रा ने अस्पताल में जाकर टायसन की स्थिति का जायजा लिया और उसे बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सेना ने यह भी कहा कि आतंक फैलाने वालों को अब कहीं भी शरण नहीं मिलेगी और खोज जारी रहेगी।