अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर में जाम की समस्या से लोग परेशान हो रहे थे। सड़क किनारे गलत तरीके से पार्किंग दिक्कतें खड़ी कर रही थीं। इसे दूर करने के लिए नगर निगम की ओर से स्लॉट पार्किंग की सुविधा दी गई, जिसका ठेका अक्तूबर 2021 में 26 लाख रुपये में आवंटित हुआ। पांच साल के ठेके के निगम को मात्र 5 लाख और कंपनी को 1.25 करोड़ मिलने हैं। तीन साल में निगम 3 लाख और कंपनी 75 लाख कमा चुकी है। चहेतों को लाभ पहुंचाने के कारण ठेका विवादों से घिर गया। जांच के लिए पिछले साल 28 दिसंबर को सात सदस्यीय कमेटी गठित की गई। कमेटी को 15 दिन में रिपोर्ट सौंपनी थी। मगर हालात ऐसे रहे कि 15-15 दिन डेडलाइन बढ़ती गई, लेकिन रिपोर्ट नहीं मिली। यहां तक कि एक महीने के बाद कमेटी के सदस्यों ने फोन उठाने तक बंद कर दिए। इस कारण अब ऑडिट का फैसला लिया गया।
मौजूदा समय में नगर निगम को प्रति वर्ष अन्य कंपनियां एक करोड़ रुपये तक देने को तैयार हैं। यानी पांच साल में नियम के अनुसार निगम 30 फीसदी ठेकेदार को देकर 3.50 करोड़ कमा सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो करार बीच में तोड़ा भी जा सकता है। फिलहाल गड़बड़ी की पोल खोलने के लिए निजी कंपनी ऑडिट की तैयारी में जुट गई है। कंपनी की रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि किस तरह की व्यवस्था होनी चाहिए। अभी तक कितना नुकसान हुआ है और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जा सकती है।
ये भी हैं लापरवाह - पार्षद अशोक सिंह मन्हास, पार्षद गोपाल गुप्ता, पार्षद सुरजीत सिंह, पार्षद रशपाल भारद्वाज, पार्षद अमित गुप्ता, दो सेवानिवृत्त अधिकारी पीडब्ल्यूडी के पूर्व मुख्य अभियंता दिनेश राम पाल और मुख्य खाता अधिकारी यश पाल खजुरिया।
कारण - कमेटी के सदस्य होने के बावजूद काम में कोताही की। बार-बार आग्रह करने के बावजूद रिपोर्ट नहीं दी।
इनकी निगरानी में हुआ ठेका - स्मार्ट सिटी के पूर्व डिप्टी सीईओ हितेश गुप्ता, उस समय के निगम कमिश्नर और पूर्व मेयर चंद्रमोहन गुप्ता। इन सभी की जिम्मेदारी थी कि आय बढ़ाने पर सही फैसला लेते। मगर ऐसा नहीं हुआ। टेंडर प्रक्रिया निजी हित को देखते हुए पूरी की गई।
इन सवालों के मिलेंगे जवाब
इतने कम लाभ पर ठेका क्यों दिया। किसने, किसे, किस उद्देश्य से लाभ पहुंचाया। चेक किया जा रहा है कि किस तरह टेंडर प्रक्रिया को पूरा किया गया। नगर निगम का हित नहीं देखते हुए ठेकेदार को सीधा लाभ पहुंचाया गया है, ऐसा क्यों हुआ।
33 जगहों में है पार्किंग
स्लॉट पार्किंग शहर की 33 जगहों में है। केसी थियेटर, सिटी सिक्येर, स्वर्ण थियेटर, गांधी नगर, महाराजा हरि सिंह पार्क, डीसी ऑफिस के अलावा अन्य जगहों में सुविधा दी गई है। ठेका इफ्राराटेक कारपोरेशन लिमिटेड को दिया गया है।
स्लॉट पार्किंग में गड़बड़ी पर ऑडिट करवाया जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद काम दूसरी कंपनी को काम दिया जाएगा। इससे नगर निगम की आय में बढ़ोतरी होगी।
- राजिंदर शर्मा, मेयर
पांच साल का ठेका निगम के पास होता तो एक करोड़ आय प्रतिवर्ष होती। कंपनी को काम देखने का 30 फीसदी मिलना चाहिए था। नियमों के अनुसार कंपनी की सेवाएं खत्म की सकती हैं।
- बलविंद्र सिंह, समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट