अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी आफ एग्रीकल्चर, साइंसेज एंड टेक्नोलाजी (स्काॅस्ट) जम्मू के बाबा जित्तो सभागार में वीरवार को हुए आठवें दीक्षांत समारोह में 590 विद्यार्थी डिग्रियां पाकर छात्र गदगद हुए। इसके साथ विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 11 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से नवाजा गया। डिग्रियां और स्वर्ण पदक पाने में बेटियां आगे रहीं। उन्होंने कुल डिग्रियों में 59 प्रतिशत और स्वर्ण पदक में 10 पदक (91 प्रतिशत) हासिल किए।
इससे पहले सभागार में अकादमिक रैली निकाली गई, जिसमें स्काॅस्ट के उपकुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी सहित संकाय सदस्य शामिल हुए। समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को मुख्य अतिथि शामिल होना था, लेकिन कोहरे और खराब मौसम के कारण उनकी उड़ान जम्मू नहीं पहुंच पाई। इसी तरह सम्मानित अतिथि के रूप में पीएमओ में मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी नहीं पहुंच पाए। इसके बाद उप राज्यपाल व कुलाधिपति मनोज सिन्हा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने दीक्षांत समारोह को आगे बढ़ाने की अनुमति दी। इस दौरान उप राज्यपाल, उपकुलपति, संकाय व विद्यार्थी निर्धारित दीक्षांत समारोह की वेशभूषा में मौजूद थे। उप राज्यपाल ने सामूहिक रूप से डिग्रियां प्रदान कीं, जिसमें समारोह के बाद सभी विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं। उपकुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी ने स्काॅस्ट जम्मू की उपलब्धियों और कार्यक्रम संबंधी रिपोर्ट पेश की। इसके बाद विद्यार्थियों को डिग्री लेकर समाज कल्याण और कृषि क्षेत्र में अपना बहुमूल्य योगदान देने के लिए शपथ दिलाई गई। समारोह में उप राज्यपाल ने 11 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। इस में बीएससी (ऑनर्स) एग्रीकल्चर (2), बी.टेक. बायोटेक्नोलाजी (2), बीवीएससी एंड एएच (1) और मास्टर्स डिग्री (6) शामिल हैं। कुल डिग्रियां पाने वालों में 243 छात्र और 347 छात्राएं थीं। इनमें सबसे अधिक 197 डिग्रियां बीएससी (ऑनर्स) एग्रीकल्चर में प्रदान की गईं। ये डिग्रियां वर्ष 2018 के आगे के बैच को प्रदान की गई हैं। समारोह में रजिस्ट्रार प्रो. सुशील कुमार गुप्ता, मुख्य सचिव अटल डुल्लू सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और अतिथिगण मौजूद रहे। अंत में सभागार के बाहर विद्यार्थियों ने हवा में टोपियां उछालकर खुशी मनाई।
स्काॅस्ट के कार्यक्रम डिग्री
बीएससी (ऑनर्स) एग्रीकल्चर 197 (57 प्रतिशत छात्राएं)
बीटेक (बायोटेक्नोलाजी) 47 (89 प्रतिशत छात्राएं)
बीवीएससीएंडएएच 60 (48 प्रतिशत छात्राएं)
पीएचडी (एग्रीकल्चर) 32 (46 प्रतिशत छात्राएं)
पीएचडी (बायोटेक्नोलाजी) 4 (100 प्रतिशत छात्राएं)
पीएचडी (बेसिक साइंस) 10 (50 प्रतिशत छात्राएं)
पीएचडी (हार्टिकल्चर) 17 (47 प्रतिशत छात्राएं)
पीएचडी (एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग) 3
पीएचडी (वेटनरी) 12 (50 प्रतिशत छात्राएं)
एमएससी (एग्रीकल्चर) 84 (62 प्रतिशत छात्राएं)
एमएससी (बायोटेक्नोलाजी) 6 (100 प्रतिशत छात्राएं)
एमएससी (बेसिक साइंस) 19 (68 प्रतिशत छात्राएं)
एमबीए (एबीएम) 12 (58 प्रतिशत छात्राएं)
एमएससी (हार्टिकल्चर) 43 (58 प्रतिशत छात्राएं)
एमटेक (एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग) 4 (50 प्रतिशत छात्राएं)
एमवीएससी (वेटनरी) 40 (45 प्रतिशत)
स्वर्ण पदक पाने वाले विद्यार्थी
यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडल
बीएससी (ऑनर्स) एग्रीकल्चर में मुस्कान कपाही (2018 बैच) और सोनल अबरोल (बैच 2019)
बीटेक बायोटेक्नोलाजी में सोनाली देवी (2018 बैच) और समरीन कौर अरोड़ा (2019 बैच)
बीवीएससीएंडएएच में शीनाम रुहिया (2017 बैच)
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यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडल (मास्टर्स डिग्री)
एमएससी एग्रीकल्चर व सायल साइंस में तमन्ना शर्मा (2020 बैच)
एग्री बिजनेस मैनेजमेंट में साक्षी दिमान (2021 बैच)
एमवीएससी के एनिमल न्यूट्रेशन में अंत्रा गुप्ता (2020)
एमएससी हार्टिकल्चर एंड फारेस्ट्री के फ्लोरीकल्चर व लैंडस्केपिंग में पूजा आर (बैच2021)
प्रो. अरुण गुप्ता मेमोरियल गोल्ड मेडल
पोस्ट ग्रेजुएट (एमएससी बेजिटेबल साइंस) में मिनाले सलाथिया (बैच 2020) और विश्वास बंद्राल (बैच 2021) शामिल हैं।
कृषि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी बेटियां
बीटेक बायोटेक्नोलाजी में यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडल हासिल करने वाली समरीन कौर अरोड़ा ने कहा कि भारत में आज लगभग हर क्षेत्र में महिलाएं आगे हैं। महिलाएं कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की क्षमता रखती हैं। मेहनत से सबकुछ हासिल किया जा सकता है। फिलहाल मैं आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हूं।
आगे बढ़ें युवा
बीएससी (ऑनर्स) एग्रीकल्चर में यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडल हासिल करने वाली सोनल अबरोल ने कहा कि आज महिलाएं पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ रही हैं। जिन क्षेत्रों में उन्हें अनदेखा किया जाता था आज वही क्षेत्र उनके योगदान से तरक्की कर रहे हैं। युवाओं को पीछे मुड़कर देखने के बजाय आगे बढ़ना चाहिए। मैं यूपीएससी की भी तैयारी कर रही हूं।
बेहतर मार्गदर्शन को हथियार बनाएं
स्कास्ट के दीक्षांत समारोह में पोस्ट ग्रेजुएट (एमएससी बेजिटेबल साइंस) में एकमात्र स्वर्ण पदक पाने वाले विश्वास बंद्राल ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता पिता और अध्यापकों को दिया है। उनका कहना है कि ये सभी लोग बच्चों का बेहतर मार्गदर्शन करते हैं और उन्हें भी अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए कड़ी मेहनत के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
तमिलनाडु जैसा जम्मू में मौसम
एमएससी हार्टिकल्चर एंड फारेस्ट्री में यूनिवर्सिटी होल्ड मेडल (मास्टर्स डिग्री) पाने वाली तमिलनाडु (उड़ी) की पूजा आर ने कहा कि उन्हें जम्मू का वातावरण और मौसम बहुत अच्छा लगा है। यह हमारे इलाके जैसा ही लगभग है। आज यहां देशभर के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। हमने जो जम्मू कश्मीर के बारे में सुना था यहां उतना नहीं है।
भारत के विकास में बेटियों की भूमिका अहम
एमवीएससी में यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडल पाने वाली अंत्रा गुप्ता ने कहा कि आज अगर उप राष्ट्रपति के हाथों मेडल मिलता तो और अच्छा लगता। लेकिन आज पदक पाकर खुशी हो रही है। उसने कहा कि पढ़ाई और दूसरे क्षेत्रों में बेटियां लगातार आगे बढ़ रही हैं और आगामी भारत के भविष्य में इनकी भूमिका अधिक रहेगी।