अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सभी जिला गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों ने सिख पहचान पर जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। फैसले में कहा गया है कि उपनाम के रूप में सिंह और कौर होना अनिवार्य नहीं है। समितियों का कहना है कि सिख पहचान गुरुओं द्वारा आशीर्वादित आचरण में निहित है। दसवें गुरु द्वारा दी गई उपाधियों के रूप में सिंह और कौर के महत्व पर जोर दिया गया है। यह उपाधि अनगिनत बलिदानों और सिख धर्म के अभिन्न सिद्धांतों का प्रतीक है।
यह आपत्ति अपीलीय प्राधिकारी एडीसी जम्मू के फैसले के जवाब में उत्पन्न हुई है। याचिकाकर्ता के दावे को खारिज कर दिया गया था कि सिख मान्यता के लिए उपनाम के रूप में सिंह और कौर होना अनिवार्य है। फैसले में जम्मू-कश्मीर गुरुद्वारों और धार्मिक बंदोबस्ती अधिनियम 1973 का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता के तर्क को परिभाषित मानदंडों के विपरीत माना गया है।
डीजीपीसी जम्मू के उपाध्यक्ष बलविंदर सिंह ने शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी के साथ बातचीत का खुलासा करते हुए एसजीपीसी के कानूनी पैनल के साथ परामर्श का आश्वासन दिया।