(फोटो पीएच वन में नाम से)
जम्मू। शिवसेना डोगरा फ्रंट ने जाति आधारित जनगणना के विरोध में वीरवार को प्रदर्शन किया। प्रधान अशोक गुप्ता ने कहा कि यह जनगणना नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह सामाजिक और राष्ट्रीय एकता के लिए ठीक नहीं।
उन्होंने कहा कि जाति आधारित जनगणना से कुछ लोगों को राजनीतिक लाभ मिल सकता है, क्योंकि इससे यह पता चल जाएगा कि किस जाति की जनसंख्या कितनी है। हमारा स्पष्ट रुख है कि किसी भी तरह की असमानता, दुश्मनी या झगड़ा नहीं होना चाहिए। सांसद ने विपक्ष के नेता की जाति पूछी तो वह इतना भड़क गए कि इंडिया गठबंधन के बाकी सदस्यों ने नारे लगाने शुरू कर दिए। जब एक व्यक्ति की जाति पूछने पर इतना हल्ल मच गया तो फिर पूरे देश की जाति कैसे पूछी जा सकती है।
भारत के इतिहास में 1931 में अंग्रेजों ने जाति जनगणना करवाई थी जो विभाजन पैदा करने के इरादे से की गई थी और वे इसमें सफल भी हुए क्योंकि 1931 में अल्पसंख्यक, उच्च जाति, निम्न जाति के बीज बोए गए जिससे देश में विभाजन हुआ और पाकिस्तान का निर्माण हुआ जो हमारे देश के लिए एक दाग के अलावा और कुछ नहीं है। ब्यूरो