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Jammu News: गुड़ा पत्तन में संदिग्ध दिखने के बाद हाई अलर्ट, जम्मू-अखनूर हाईवे पर बढ़ाई सुरक्षा

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दो लोगों ने देखे सेना की वर्दी में तीन संदिग्ध, एसपी ग्रामीण बृजेश शर्मा ने अधिकारियों के साथ लिया मौके का जायजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। कठुआ के बदनोता में सेना के गश्ती दल पर घात लगाकर हुए आतंकी हमले के बाद से सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार संदिग्धों का दिखना जारी है। डोडा, उधमपुर, बिलावर के बाद अब अखनूर सेक्टर के पास गुड़ा पत्तन इलाके में वीरवार देर रात संदिग्ध दिखने की सूचना पर जम्मू-अखनूर हाईवे पर सुरक्षा बढ़ाकर हाई अलर्ट कर दिया गया है। पुलिस ने नाकाबंदी बढ़ा दी है। एसएसपी जम्मू डॉ. विनोद कुमार ने मौके पर पहुंचकर एसपी ग्रामीण बृजेश शर्मा व अन्य अधिकारियों के साथ मौके का जायजा लिया।

जानकारी के अनुसार वीरवार रात एक बजे गुड़ा पत्तन के एक व्यक्ति ने गांववासियों को फोन कर सूचित किया कि जब वह अपने पोल्ट्री फार्म के बाहर सो रहा था तो उससे सेना की वर्दी में तीन हथियारबंद लोगों ने पानी मांगा। संदिग्ध व्यक्तियों में से एक ने उससे मोबाइल फोन मांगा, लेकिन उसके नहीं था। इसके बाद वे वहां से चले गए। संदिग्ध व्यक्तियों के जाने के कुछ ही मिनटों के बाद उसने गांव के नायब सरपंच व नंबरदार को सूचना दी। वहीं रिहायशी क्षेत्र से कुछ मीटर दूर मुख्य सड़क के किनारे मार्बल की दुकान पर काम करने वाले बाहरी राज्य के मजदूर का दावा है कि रात को 1:30 बजे जब बत्ती गुल होने पर वह बाहर निकला तो उसने तीन संदिग्धों को गुजरते देखा।
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पोल्ट्री फार्म संचालक की सूचना के बाद सेना ने तुरंत क्षेत्र को चारों ओर से घेर लिया व दोपहर तक लगातार क्षेत्र में गहन तलाशी अभियान चलाया। शुक्रवार दोपहर 12 के बाद तेज बारिश के कारण तलाशी अभियान में थोड़ी देर के लिए रोका गया। मगर बारिश के थमते ही सेना व पुलिस के जवानों ने क्षेत्र में पूछताछ की।
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नदी-नालों और आतंकियों के पुराने रास्तों पर बढ़ा पहरा
कठुआ। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि डोडा से लेकर रियासी, कठुआ से लेकर उधमपुर तक आतंकियों के विभिन्न दल घुसपैठ के पुराने रूट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि बिलावर के लोहाई मल्हार से लेकर डुडू बसंतगढ़ से चिनाब घाटी को जाने का सीधा संपर्क नदी-नालों और जंगलों से है। लोहाई मल्हार और डुडू बसंतगढ़ तक आतंकी पूर्व में भी कठुआ जिले के दरियाओं व नालों का इस्तेमाल करते रहे हैं। न सिर्फ सांबा और हीरानगर की सीमा बल्कि पंजाब और जम्मू-कश्मीर से सटे अंरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र से भी घुसपैठ की सूचनाएं सामने आती रही हैं।
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जम्मू संभाग में हाल के महीनों में बढ़ी आतंकी वारदातों ने साफ कर दिया है कि घुसपैठ के अति संवेदनशील रूट एक बार फिर सक्रिय हो रहे हैं। हालांकि बीएसएफ का दावा है कि जम्मू संभाग में लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा से हाल फिलहाल की कोई घुसपैठ नहीं हुई है। खुफिया एजेंसियां बेई नाले, उज्ज समेत रावी दरिया के संभावित घुसपैठ के रूट पर भी नजर रखे हुए हैं। पहाड़पुर, मादा-भाग नाला से छब्बे चक्क, उज्ज, राजबाग, पानसर-बसेरा नाला, हरियाचक शाप नाला, किशनपुर, मनियारी-मंडियाल-तरनाह नाला, बेई नाला-जांडी नाला, लोंडी मोड़, करोल कृष्णा-चकड़ा से चड़वाल हाईवे और चंदवां से हरिपुर-पाटल घुसपैठ के पुराने रूट माने जाते हैं। इन नालों को पहाड़ी इलाकों से जोड़ने वाले तमाम रास्तों पर पहरा बढ़ा दिया गया है।

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