साहिब बंदगी के सद्गुरु मधु परमहंस ने सरकारी चौक में किया सत्संग
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू/ज्यौड़ियां। साहिब बंदगी के सद्गुरु मधु परमहंस महाराज ने रविवार को सतवारी चौक के स्कूल ग्राउंड में संगत को प्रवचनों से निहाल किया। कहा कि कर्म फांस में संसार बंधा हुआ है। कर्म के विधान को समझें। यह जरूरी है। शास्त्रों में जो व्याख्याएं आत्मतत्व के लिए दी हैं, बड़ी स्पष्ट हैं। आत्मा कर्म, अकर्म दोनों से परे है। आत्मा का कर्म से कुछ नहीं लेना।
बताया कि जितने भी धर्म शास्त्र हैं, साफ संदेश दे रहे हैं कि परमात्मा अंदर है। गीता में भी, रामायण में भी। साहिब ने भी बोला कि यह इंसान मृगा की कस्तूरी की तरह बाहर भटक रहा है। 5 तत्वों के लिए सुना होगा। जल तत्व, पृथ्वी तत्व, अग्नि तत्व, वायु तत्व और आकाश तत्व। इन तत्वों के लिए धर्म शास्त्र बोल रहे हैं कि सब नाशवान हैं। वैज्ञानिक भी नाशवान बोल रहे हैं। जितने भी धर्म प्रवर्तक हैं, सब संसार को नाशवान बोल गये। पुष्टि वेदों में भी है। जब प्रलय आती है तो कहां चले जाते हैं ये तत्व। जैसे हम स्वप्न देखते हैं तो सब पदार्थ सत्य प्रतीत होते हैं। जागने के बाद कुछ नहीं होता है। कुछ लोग इन तत्वों की उपासना करते हैं। बरबस दिमाग में विचार आयेगा कि क्यों करते हैं इनकी उपासना। हम भौतिक जीवन में हैं। जल, वायु, पृथ्वी के बिना हम जी नहीं सकते। इसलिए, इनके प्रति श्रद्धा है।
कहा कि जब श्रीराम ने अपने गुरु वशिष्ठ को संसार के दुखों के लिए बोला तो वशिष्ठ जी ने कहा कि हे राम, किस संसार की बात कर रहे हैं। संसार कभी हुआ ही नहीं। यह चित्त की कल्पना है। ये तत्व रूपांतरित होते हैं। जब महाप्रलय होती है तो पृथ्वी को जल अपने में समाहित कर लेता है। सूर्य पृथ्वी के इतनी निकट आ जाता है कि हजारों डिग्री तापमान हो जाता है। आग जल को शोषित कर देती है। आग तो गैसें हैं। ये रूपांतरित हो गये। अब वायु रह गयी। इसे आकाश अपने में लीन कर लेता है। वायु का उद्गम ही आकाश से है। सारा संसार शून्य से है। लेकिन, निराकार से भी परे एक सत्य है। उसी सत्य का संदेश संतों ने और साहिब ने दिया है। सद्गुरु के सत्य नाम को पाकर ही आत्मा अपने सही घर अमर लोक जा सकती है।