संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। साहिब बंदगी के सद्गुरु मधुपरमहंस महाराज ने रविवार को जम्मू के रखबंधु में अपने प्रवचनों की अमृत वर्षा से संगत को निहाल करते हुए कहा कि कबीर साहिब को जिंदा बाबा भी कहते हैं। धर्मदास वैष्णव थे। वे अपना भोजन खुद बना रहे थे। एक लकड़ी डाली। उसमें कई चींटियां निकली। कई मर चुकी थीं। धर्मदास दुखी हुए। बोले कि अब यह नहीं खाऊंगा। इधर उधर देखा तो दूर एक पेड़ के नीचे कबीर साहिब, जिंदा बाबा फकीर रूप में मिले।
धर्मदास ने उनको वो खिचड़ी दे दी। कबीर साहिब ने कहा कि कई जीव मारकर आ रहे हो और वो प्रसाद आकर मुझे दे रहे हो। धर्मदास को अचरज हुआ, बोला कि आपको कैसे पता चला कि जीव घात हुआ है। साहिब ने कहा कि सद्गुरु के नाम के प्रताप से जान गया। धर्मदास ने कहा कि मुझे बताओ कि यह नाम क्या है। अपना परिचय दो। साहिब ने कहा कि मेरा नाम जिंदा है। मैं सद्गुरु के साथ हमेशा रहता हूं। मैं उनका सेवक हूं। मेरा और कोई ठिकाना नहीं है।