बाड़ी ब्राह्मणा। पुरमंडल सगुन 16 किलोमीटर सड़क 17 साल बाद भी अधूरी है। इसके चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर स्कूल के बच्चों और महिलाओं का कहना है कि किन दुर्गम परिस्थितियों में वह स्कूल जाते हैं और महिलाएं चूल्हा चौका चला रही हैं।
स्कूल के बच्चों ने बताया कि स्कूल जाने के लिए उन्हें सुबह जल्दी उठना पड़ता है। कम से कम एक घंटा पहले निकलना पड़ता है। ताकि समय पर स्कूल पहुंच सकें। अगर बारिश हो जाती है तो कई बार स्कूल भी नहीं पहुंचा जाता है। सर्दियों में स्कूल जाना काफी मुश्किल हो जाता है। शाम को घर पहुंचते अंधेरा हो जाता है। क्योंकि सारा सफर पैदल ही तय करना पड़ता है। आज भी बच्चों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। सड़क नहीं होने के कारण यातायात नहीं है, जिसके चलते सारा काम पैदल ही करना पड़ता है।
दूसरी ओर महिलाओं से बात करने पर पता चला कि सड़क न होने के कारण यातायात का साधन न होने के चलते जीवन यापन मुश्किल हो जाता है। दिहाड़ी मजदूरी से आजीविका कमाना मुश्किल है। लिहाजा सरकार से अपील है कि बच्चों का भविष्य अंधकार से बाहर निकालने के लिए इस सड़क का मरम्मत कार्य जल्द से जल्द कराया जाए।
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दो साल पहले लैंग्वेसिंग स्कीम के तहत प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी की तरफ से भेजा गया है। सरकार की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। बताया जा रहा है कि फंड की कमी के कारण प्रस्ताव में देरी हो रही है।
-पुरुषोत्तम जोशी, एईई
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रिमाइंडर के बारे में उच्च अधिकारी से करें बात
एईई पुरुषोत्तम जोशी का कहना है कि हमारा काम प्रोजेक्ट बनाकर देने का होता है। रिमाइंडर देने का नहीं। सरकार की तरफ से जब फंडिंग होगी तो इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। वैसे भी सरकार के पास हजारों प्रोजेक्ट विभागों की तरफ से भेजे जाते हैं। हर किसी का रिमाइंडर नहीं दिया जा सकता। जो लोग अपने प्रोजेक्ट का फॉलोअप करते हैं। उनके प्रोजेक्ट बहाल हो जाते हैं। जो नहीं करते उनके रह जाते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए उच्च अधिकारी से बात कर की जा सकती है।
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सड़क न होने के कारण बड़ी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। स्कूल आने जाने में ही सारा समय निकल जाता है। घर आकर पढ़ने का समय ही नहीं बचता।
-संदीप सिंह, विद्यार्थी
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स्कूल से वापस आने पर काफी थकान हो जाती है, जिससे कई प्रकार की दिक्कतें होती हैं। अगर यातायात की सुविधा मिल जाए तो भविष्य में कुछ कर दिखाने की कोशिश करेंगे।
-गुरदेव सिंह, विद्यार्थी
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हमारी शादी इस क्षेत्र में हुई है, लेकिन ऐसा महसूस होता है कि अभी भी पुराने जमाने में रह रहे हैं। अभी तक यातायात की सुविधा पूरी तरह से मुहैया नहीं हो पाई है।
-अंजली देवी, स्थानीय निवासी
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आखिरकार इस क्षेत्र की सुध सरकार क्यों नहीं ले रही है। हमारी हालत बद से बदतर होती जा रही है। डिजिटल जमाने में सड़क और यातायात की सुविधा न मिलना सरकार की नाकामी दर्शाती है।
-मोहन लाल, स्थानीय निवासी