संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू/सांबा। ध्यान और सिमरन से मानव जीवन की समस्याओं का समाधान होगा। यह प्रवचन साहिब बंदगी के सद्गुरु श्री मधुपरमहंस ने शुक्रवार को पूर्णिमा के अवसर पर रांजड़ी आश्रम में किए। उन्होंने कहा कि संसार कर्म भूमि है। कर्म दो प्रकार के हैं। शुभ और अशुभ। झूठ, मांसाहार, परस्त्रीगमन आदि पाप कर्म हैं। निकृष्ट कर्मों को छुपाने के लिए इंसान झूठ बोल रहा है। जीभ के स्वाद के लिए मांसाहार कर रहा है। यह सब मन करवा रहा है। पर आत्मा उर्जा दे रही है, इसलिए सजा मिल रही है। इस पाप और पुण्य की समस्या से निकलना है तो ध्यान लगाएं। कुछ कहते हैं कि ध्यान में बैठते हैं, लेकिन कुछ पता नहीं चलता। ध्यान में यह सोचकर मत बैठो कि प्रकाश दिखेगा बल्कि आप एकाग्र हों। सिमरन करें। सिमरन ध्यान की कुंजी है। इंद्रियों में रमी आत्मा सिमरन से ही एकाग्र होगी। सिमरन चलते फिरते, खाते-पीते कर सकते हैं।