जम्मू। सतवारी ग्राउंड में रविवार को सत्संग का आयोजन किया गया। इस दौरान मधु परमहंस ने प्रवचनों की वर्षा करते हुए कहा कि मनुष्य के कर्मों के अनुसार ही उसका दिमाग बनता है और ये कर्म बिना सद्गुरु की कृपा के कट नहीं सकते हैं।
रानी इंद्रमति के बारे में साहिब कहते हैं कि इसके आगे सुरति का सागर है। आपकी सुरति है, उसी का सारा खेल है। यह सुरति परम पुरुष से निकली हुई एक किरण है। आप सोच सकते हैं कि सूर्य में कितना प्रकाश होता है। वहीं पर मन छूटता है। आपके अंतःकरण में भी आत्मा और मन है। आपकी आंख में भी आत्मा और मन है। दोनों की एक जगह बैठक है, इसलिए मन समझ में नहीं आ रहा है। इडा और पिंगला के बीच में सुषुम्ना नाड़ी है। यह नाड़ी परम लोक तक जाने का रास्ता है। इस सुषुम्ना पर साहिब ने खूब कहा है कि सुषुम्ना नाड़ी के मध्य में मन है। उसका एक ही काम है-आत्मा को आगे नहीं जाने देना। साहिब कहते हैं कि तन स्थिर हो जाए, मन भी स्थिर हो जाए, सुरति, निरति सब एकाग्र हो जाएं तो कल्पांतर की साधना करने से जो फल प्राप्त नहीं हो सकता है, वह एक पल में हो जाता है।