- जीरो लाइन के पास बाबा चमलियाल की दरगाह पर लगा मेला
- पाकिस्तानियों ने भी अपनी जमीं पर खड़े होकर किया सजदा
- सबसे पहले बीएसएफ अधिकारियों ने पूरी की चादर चढ़ाने की रस्म
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। भारत-पाकिस्तान सरहद पर जीरो लाइन के पास बाबा चमलियाल की दरगाह पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने मजार पर शीश नवाया। पाकिस्तानियों ने भी अपनी जमीं पर खड़े होकर बाबाजी का सजदा किया। वीरवार को यहां वार्षिक मेले का आयोजन किया गया। दिनभर कतारों में खड़े होकर श्रद्धालुओं ने बाबा चमलियाल के दर पर माथा टेककर आशीर्वाद लिया।
सुबह सबसे पहले बीएसएफ के अधिकारियों ने मजार पर चादर चढ़ाने की रस्म अदा की। बीएसएफ के अधिकारी ने सीमा पर शांति बनाए रखने की दुआ मांगी। एएसपी सुरिंदर चौधरी और एडीसी सुरेश शर्मा ने मेलास्थल पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। दरगाह के पुजारी ने कहा कि करीब दो हजार श्रद्धालु बुधवार रात को ही यहां पहुंच गए थे। इनके रहने के लिए पूरा प्रबंध किया गया। बाबा चमलियाल कमेटी के अध्यक्ष बिल्लू चौधरी ने कहा कि पहले बाबा की मजार की शक्कर और शरबत पाकिस्तान के लोगों को भी बांटी जाती थी। अब दोनों देशों के बीच विवाद के कारण शक्कर-शरबत पाकिस्तान नहीं भेजी जा रही है।
पठानकोट से आए श्रद्धालु हरभजन सिंह ने कहा कि उन्हें चंबल (त्वचा) रोग था, वह पिछले साल बाबा के दरबार में आए थे और शक्कर-शरबत लगाने से उन्हें काफी आराम पहुंचा। अब दोबारा हाजिरी लगाने पहुंचे हैं। होशियारपुर से आई रेखा ने कहा कि वह पहली बार परिवार के साथ आई है। उनके रिश्तेदार ने बताया था कि उन्हें चंबल रोग से आराम मिला था, तो वे भी यहां पहुंचे हैं।
मेले में सजी दुकानों पर दिन भर लोग खरीदारी करते रहे। बच्चों के साथ बड़ों ने भी झूला झूलने का आनंद लिया। जिला प्रशासन की ओर से विभिन्न विभागों के स्टाॅल लगाए गए थे। बुधवार रात को बारिश के बाद दिन में गर्मी से कुछ राहत मिली। यातयात पुलिस कर्मी लोगों को आने-जाने के लिए मार्ग के बारे में जागरूक करते रहे। जीरो लाइन पर बीएसएफ के जवान अलर्ट थे। पाकिस्तान की तरफ से लाउड स्पीकर की आवाजें सुनाई दे रहीं थीं। सीमा पार बनाई गई बाबा की मजार पर छह दिन तक मेला चलता है।
त्वचा रोग ठीक होने की उम्मीद से पहुंचते हैं लोग
बाबा चमलियाल की दरगाह की शक्कर और शरबत में औषधीय गुण होने का दावा किया जाता है। यह औषधीय गुण ऐसे हैं, जिनसे त्वचा रोग में आराम मिलता है। चर्म रोग वाले लोग यहां शक्कर और शरबत लेने के लिए आते हैं। अधिकांश मरीज कई दिनों तक यहां रहकर शक्कर और शरबत का उपयोग करते हैं। दरगाह की स्थापित प्रथा के अनुसार, मरीज को कम से कम 21 दिन तक लेप लगाना होता है। गंभीर रोग पर लोग यहां रहकर कई महीने तक लेप लगाते हैं। ठहरने के लिए यहां कमरे बनाए गए हैं।