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Jammu News: मायसुमा में अब पत्थरबाजी और देशविरोधी नारे नहीं, हवन-पूजन के मंत्रोच्चार गूंज रहे

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- आनंदेश्वर भैरव नाथ मंदिर में मनाई आचार्य अभिनवगुप्त की जयंती
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- कश्मीरी पंडितों ने 35 साल बाद किया विशेष हवन-पूजन

- धार्मिक कार्यक्रम में स्थानीय मुस्लिमों ने भी दी मदद
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। श्रीनगर के मायसुमा इलाके में 90 के दशक में पत्थरबाजी के साथ देशविरोधी नारे लगाए जाते थे, आज यहां भाईचारे की मिसाल देखने को मिल रही है, हवन के मंत्रोच्चार गूंज रहे हैं। मंगलवार को कश्मीरी पंडितों ने क्षेत्र में स्थित आनंदेश्वर भैरव नाथ मंदिर में आचार्य अभिनवगुप्त की जयंती मनाई। इसमें विशेष हवन-पूजा का आयोजन किया गया। अनुष्ठान को पूरा करने में स्थानीय मुस्लिमों ने भी सहयोग किया।
मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे मंदिर में रुद्राभिषेक किया गया। हवन और भजन कीर्तन के साथ शाम को आरती हुई। श्रद्धालुओं के लिए लंगर भी लगाया गया। यह आयोजन श्री आनंदेश्वर भैरव नाथ अस्थापन ट्रस्ट की ओर से किया गया।
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स्थानीय निवासी बशीर अहमद ने बताया कि इस इलाके में शुरू से ही बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित रहा करते थे। तब भी भजनों की आवाज गूंजा करती थी। आज एक बार फिर से वही अहसास हुआ। उन्होंने कहा कि कई पंडित अभी भी इलाके में रहते हैं और यहां भाईचारा कायम है। वह एक काला दौर था जब हमारे भाई यहां से पलायन करने को मजबूर हुए। मंदिर परिसर में मौजूद हीरालाल कौल ने कहा, आचार्य अभिनवगुप्त की जयंती के उपलक्ष्य में विशेष हवन किया। जम्मू से भी श्रद्धालु पहुंचे हैं। यहां हमे स्थानीय मुसलमानों से बहुत सहयोग मिला है, यहां का माहौल सुखद है। कहा कि कश्मीर के मंदिरों के नवीकरण की जरूरत है। हीरालाल ने कहा, आनंदेश्वर भैरव नाथ मंदिर भी काफी जर्जर हालत में है। डीसी के संज्ञान में भी यह बात लाई है। एक श्रद्धालु तेज किशन ने कहा, आनंद भैरव जी यहां भगवान शिव से भी पहले आए थे। यहां भगवान शिव का मंदिर है। मंदिर में 35 वर्षों के बाद हवन और विशेष पूजा-अर्चना की। लंगर का भी प्रबंध किया गया।
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