अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। छठ पूजा की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस साल यह पर्व 17 नवंबर को नहाय खाय से शुरू होगा। 19 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। 20 नवंबर को सूर्योदय के साथ व्रती भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगे।
महंत रोहित शास्त्री के अनुसार इस वर्ष 17 नवंबर शुक्रवार को नहाय-खाय से छठ व्रत का आरंभ होगा है। अगले दिन 18 नवंबर शनिवार को खरना होगा। इस वर्ष सूर्य षष्ठी उदयव्यापिनी तिथि 19 नवंबर रविवार को है। यह पर्व चार दिन चलता है।
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को सूर्य षष्ठी का व्रत करने का विधान है। इस पर्व को छठ पूजा, छठ, छठी माई की पूजा, छठ पर्व, डाला पूजा और सूर्य षष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। छठ पूजा के दिन माता छठी की पूजा की जाती हैं, जिन्हें सूर्य देव की पत्नी (ऊषा ) कहा गया है। पूजन विधि : इसमें तीन दिन के कठोर उपवास का विधान है। व्रती को पंचमी को एक बार नमक रहित भोजन करना पड़ता है। षष्ठी को निर्जल रहकर व्रत करना पड़ता है। षष्ठी को अस्त होते हुए सूरज को विधिपूर्वक पूजा करके अर्घ्य दिया जाता है।
सप्तमी के दिन सुबह नदी या तालाब पर जाकर स्नान करना होता है। सूर्य उदय होते ही अर्घ्य देकर जल ग्रहण करके व्रत को खोलना होता है। इस व्रत में प्रसाद मांग कर खाने का विधान है। 20 नवंबर सोमवार - पारण सुबह के समय उगते सूर्य को अर्घ्य देकर किया जाएगा। जम्मू में सूर्य उदय का समय सुबह 7 बजकर 8 मिनट पर होगा।