जम्मू। सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार शुक्रवार 13 अगस्त को नागपंचमी (ऋषि नागपंचमी) है। मंदिरों में नाग देवता की पूजा के साथ भगवान शिव की भी आराधना की जाएगी। पंचमी के दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व स्नान कर व्रत और पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थल पर नाग देवता का चित्र लगाएं या मिट्टी के सर्प देवता बनाकर उनको लाल कपा बिछाकर चौकी पर स्थापित कर दें। हल्दी, रोली, चावल, कच्चा दूध और फूल चढ़ाकर नाग देवता की पूजा करें। कच्चा दूध, घी, चीनी मिलाकर अर्पित करें। महंत रोहित शास्त्री के अनुसार जम्मू की लोक परंपराओं में मान्यता है कि वासुकि नाग की वंश परंपरा में से जम्मू-कश्मीर के कई स्थानों में नागों ने अपना निवास स्थान बनाया। ‘डुग्गर’ प्रदेश के प्राचीन इतिहास में नागराज वासुकि की वंश परंपरा में काई, भैड़, कैलख, सुरगल, तालान, मानसर, रचिल नामक 22 पुत्र चौरासी पुत्री-पौत्रों का वर्णन मिलता है, जिनका जम्मू के अलग-अलग स्थानों पर देवस्थान है।