रियासी। बाबा बिड्डा जी के मंदिर प्रांगण में जारी श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को प्रवचन देते कथावाचक सूरज कौशल ने कहा कि धर्म की कोई परिभाषा नहीं होती। किसी की सेवा बिना स्वार्थ के करना धर्म है। गरीब को दान,भूखे को अन्न,नंगे को कपड़े और चप्पल जूते देना भी धर्म है। मंदिरों में जाकर दान देना भी धर्म में ही आता है। धर्म का कार्य करके ही कर्म को कमाया जाता है। सभी लोगों को अपने धर्म के प्रति श्रद्धा रखकर इसका पालन करना चाहिए। जारी कथा का समापन 18 सितंबर को हागा। संवाद