श्री सनातन धर्म सभा में श्रीमद्भागवत कथा में संगत को बताया जीने का रहस्य
संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। श्री स्थानीय धर्म सभा में छह दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा जारी है। वीरवार को तीसरे दिन कथावाचक सूरज कौशल शास्त्री ने संगत को जीने के रहस्य के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मौत और जिंदगी का फैसला परमात्मा के हाथ में है। हमें तो सिर्फ कर्म करना है।
इस संसार में जो आया है उस की मौत तय है। सिर्फ समय और स्थान परमात्मा ही तय करेगा। जिस को हम अपना मान रहे हैं वह सबकुछ वहम है। समाज में प्रतिष्ठता पाने के लिए सुंदर मकान बनाना और पत्नी व बच्चों से प्यार करना भी धर्म है। नौकरी या दुकान पर आठ घंटे काम करना कर्म है।
इंसान के मन में कुछ ज्यादा पाने का लोभ होता है। इसलिए एकांत में आंखें बंद कर अपने आप से प्रश्न करो कि हम क्या हैं। समय के हिसाब से इंसान की आंखें, नाक, कान व शरीर के कई हिस्से काम करना छोड़ देते है। हम इन चीजों को रोक नहीं सकते हैं।
जीवित होने पर इंसान हर एक चीज पर अपना हक जमाने की कोशिश में रहता है। इसके लिए कई बार वह गलत कार्य भी करता है। लेकिन, बाद में सब यहीं धरा रह जाता है। कथा के समापन पर संगत में वितरित किया गया।