रियासी। ओपन एयर थियेटर में मंगलवार को रामलीला के दूूसरे दिन राजा दशरथ के हाथों श्रवण कुमार को लगे बाण का मार्मिक दृश्य मंचित किया गया। इस दृश्य को देखकर रामलीला के दर्शक भावुक हो गए। इसके अलावा रामलीला में ताड़का वध का भी मंचन किया गया।
ग्रामीणों ने राजा दशरथ को बताया कि गांव में एक शेर ने आतंक मचा रखा है। उसने मवेशियों को मौत के घाट उतार दिया है, जिससे ग्रामीणों के बीच भय का माहौल है। इसे देखते हुए राजा दशरथ शेर को मारने जंगल में जाते हैं। इसी दौरान अपने अंधे माता पिता को कंधे पर उठा कर चार धाम यात्रा कराने निकले श्रवण कुमार भी उसी जंगल में पहुंचते हैं। जंगल में एक स्थान पर अपने माता पिता को बैठा कर श्रवण कुमार पानी लाने सरयू नदी किनारे आते हैं। कलश में पानी भरने की आवाज राजा दशरथ को शेर के पानी पीने की आवाज लगी।
इसी दौरान राजा दशरथ एक शब्दभेदी बाण छोड़ देते हैं, जो श्रवण कुमार के सीने में जाकर लगता है। इससे श्रवण कुमार की मौत हो जाती है। मौत से पहले श्रवण कुमार राजा दशरथ से विनती करते हैं कि वह उनके प्यासे माता पिता को पानी पिला दें। जब राजा दशरथ श्रवण कुमार के माता पिता को पानी देने जाते हैं तो अपने पुत्र की मौत का समाचार सुनकर वे राजा को श्राप देते हैं कि जैसे वे पुत्र वियोग में प्राण त्याग रहे हैं, ठीक वैसे ही राजा दशरथ भी पुत्र वियोग में दम तोड़ेंगे। इसके बाद श्रवण कुमार के माता पिता भी परलोक सिधार गए। इस दृश्य में विशाल बनाथिया ने श्रवण कुमार तथा राजेश केसर ने राजा दशरथ की भूमिका निभाई।
रामलीला में दूसरा दृश्य राजा दशरथ के दरबार हुआ, जिसमें गुरू विश्वामित्र राजा से श्रीराम और लक्ष्मण को उनके साथ राक्षसी ताड़का का वध करने को भेजने के लिए कहते हैं। दृश्य में राजा दशरथ की भूमिका संजय केसर, विश्वामित्र की भूमिका अतुल केसर, श्रीराम की भूमिका सार्थक शर्मा और लक्ष्मण के रूप में उद्धव शर्मा नजर आए। दृश्य में राक्षस जंगल में पहुंच कर साधुओं के यज्ञ को तहस नहस कर देते हैं। मौके पर श्रीराम और लक्ष्मण आकर सभी राक्षसों के साथ ताड़का का भी वध कर जंगल की दहशत को समाप्त करते हैं। ताड़का वध होते ही दर्शकों ने जय श्रीराम का घोष किया।