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मुदस्सिर सजाते हैं मंच, मूर्छित लक्ष्मण में जान फूंकते हैं तारिक

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बसोहली। ऐतिहासिक कला नगरी बसोहली की 110 साल पुरानी प्रसिद्ध रामलीला गंगा जमुनी तहजीब की भी मिसाल है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हिमाचल के दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रामलीला में मंच सजाने से लेकर कुर्सियां लगाने का काम 20 वर्षों से मुदस्सिर सरनाज कर रहे हैं। वहीं, सुषेण वैद्य बनकर तारिक जावेद मूर्छित लक्ष्मण में संजीवनी से जान फूंककर तालियां बटोरते हैं।
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तारिक जावेद ने 1998 में हनुमान की सेना में शामिल होकर ऐतिहासिक रामलीला में पदार्पण किया था। वर्ष 2000 में सुषेण वैद्य का किरदार निभाने का मौका मिला तो उन्होंने मूर्छित लक्ष्मण को स्वस्थ करने के साथ ही दृश्य में भी जान फूंक दी। मंझे हुए कलाकारों के बीच दर्शकों से खचाखच भरे रामलीला मैदान में तारिक जावेद सुषेण वैद्य बनकर रामलीला के दृश्य में चिंतित श्री राम को आश्वस्त कर कहते हैं कि लक्ष्मण के मुख पर मृत्यु चिह्न नहीं हैं, अत: आप निश्चिंत रहिए। इसके बाद हनुमान की लाई संजीवनी बूटी का अर्क पिलाकर सुषेण वैद्य लक्ष्मण में जान फूंक देते हैं और रामलीला मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता है। बसोहली के वार्ड छह निवासी और गिफ्ट सेंटर संचालक तारिक कहते हैं कि रामलीला उनके लिए खास आयोजन है। रिहर्सल फिर शुरू हो गई है। इस बार भी वह सुषेण वैद्य के पात्र को पूरी शिद्दत से निभाने के लिए उत्सुक हैं।
अटल सेतु ने बढ़ाए हिमाचल-पंजाब के दर्शक
बसोहली में रामलीला देखने के लिए पंजाब और हिमाचल से बड़ी संख्या में लोग आते थे। रंजीत सागर बांध बनने से संपर्क कट गया। इसका असर रामलीला के दर्शकों पर पड़ा, लेकिन अटल सेतु बनने के बाद फिर से अब हर साल बड़ी संख्या में दर्शक पंजाब और हिमाचल से पहुंचने लगे हैं।
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एक साथ दो दरबार, मंच पर कोई पर्दा नहीं
यहां मंच पर पर्दा नहीं होता। दो दरबार एक साथ सजते हैं। एक दृश्य का मंचन होता है तो दूसरे दरबार में तैयारी चलती है। पारंपरिक रूप से रामलीला देखने लोग दूर-दूर से आते थे। इसलिए एक मंच और पर्दे की व्यवस्था से समय कम मिलता था। ऐसे में दो दरबार सजाकर दर्शकों के समय की बचत की जाती है। दृश्यों को जीवंत करने के लिए हनुमान 100 मीटर की ऊंचाई और 200 मीटर लंबी बांधी रस्सी के सहारे आकाश मार्ग से संजीवनी लेकर आते हैं। श्री राम, सीता और लक्ष्मण को सरयू नदी पार करवाते केवट का दृश्य नीलकंठ मंदिर के ऐतिहासिक रानी तालाब में किया जाता है।
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