जम्मू। लोक निर्माण विभाग अपनी नाकामी छिपाने के लिए कंक्रीट युक्त सड़कें बनाने की तैयारी में है। हर साल बारिश से तारकोल की सड़कें टूट जाती हैं, जिससे करोड़ों रुपये बर्बाद होते हैं। तारकोल बिछाने वाले ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करने के बजाय आलाधिकारी अब नई योजना बना रहे हैं।
नियमों के तहत तीन से पांच साल तक सड़क में मरम्मत करने की आवश्यकता नहीं होती। खराब मौसम या फिर सर्दी में सुबह तारकोल बिछाने के बाद सड़क क्षतिग्रस्त होने पर दोबारा काम की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होती है। मानकों को देखें तो पहले खोदाई होती है। पत्थरों को हटा कर समतल किया जाता है। बाद में रोड़ी डाली जाती है और मिट़्टी के बाद फिर रोड़ी। इसके बाद तारकोल दो बार बिछाया जाता है। मगर हो यह रहा है कि तारकोल के ऊपर तारकोल या फिर जहां पर गड्ढे हैं वहां पत्थर भरकर तारकोल को समतल कर दिया जाता है। इस कारण हर साल करोड़ों रुपये पानी में बह जाते हैं।
दो बारिश में 2 करोड़ का नुकसान
शहर में अब तक दो बारिश हुई है। छोटी और बड़ी 212 सड़कें हैं। इनमें 130 सड़कों में फिर से गड्ढे हो गए हैं। दो करोड़ का नुकसान हो चुका है। बीते साल बरसात में छह करोड़ डूबे थे। अक्टूबर 2022 में गड्ढों को फिर से ठीक किया था। इसके बावजूद हालात ऐसे हैं कि सड़कों पर जान जोखिम में डालकर वाहनों में जाना पड़ रहा है।
दो से तीन बार तारकोल बिछाया, फिर उखड़ा
बेलीचराना, कासिम नगर, गुम्मट और डोगरा चौक सहित अन्य सड़कों में अप्रैल 2022 से लेकर अब तक दो से तीन बार तारकोल बिछाया। बेलीचराना में दो चरणों (अप्रैल व अक्टूूबर 2022) में काम हुआ। फिर भी स्थिति बदतर है। कासिम नगर-नरवाल सड़क में तारकोल बिछाने के बाद ही सीवरेज लाइन के लिए खोद दिया गया। गुम्मट सड़क व डोगरा चौक सहित अन्य सड़कों का भी ऐसा ही हाल है।
गुणवत्ता का रखा जाए ध्यान
पूर्व मेयर चंद्र मोहन गुप्ता के अनुसार लोक निर्माण विभाग को पहले ही कंक्रीट की सड़कें बनाने की सलाह दी थी। इसी तरह नेता विपक्ष द्वारका चौधरी ने बताया कि वार्ड हो या फिर अन्य सड़कें, सभी बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई। काम सही तरीके से नहीं हो रहा। वार्ड-28 के पार्षद गौरव चोपड़ा ने कहा कि सड़क बनाने के दौरान मानकों का ध्यान रखा जाए।
सड़कें बार-बार क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इस कारण हर साल मरम्मत करवानी पड़ रही है। जहां पर ज्यादा परेशानी है, वहां कंक्रीट की सड़कें बनाई जाएंगी। इससे पैसों की बर्बादी नहीं होगी।
- केवल सिंह, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग