अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) जम्मू कश्मीर ने प्रदेश में गैर लोकतांत्रिक सरकार के पांच साल पूरा होने पर चुनाव आयोग कार्यालय जम्मू के बाहर लोकतंत्र बहाली एवं राज्य का दर्जा लौटाने के लिए प्रदर्शन किया। इसे कई सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला। प्रदेश प्रमुख मनीश साहनी के नेतृत्व में सहयोगी दलों ने लोकतंत्र एवं राज्य का दर्जा बहाल करो के नारे लगाए।
साहनी ने कहा कि जून 2018 में पीडीपी-भाजपा सरकार के पतन के बाद पांच सालों से एक लोकतांत्रिक सरकार का पूरा कार्यकाल राज्यपाल और उप राज्यपाल शासनकाल की भेंट चढ़ चुका है। 23 जून को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर के दौरे पर आ रहे हैं। राज्य का दर्जा लौटाने का वादा पूरा नहीं किया तो शिव सैनिक काली पट्टियां बांध उनके दौरे का विरोध करेंगे। इस मौके पर चेयरमैन राकेश गुप्ता, महासचिव विकास बख्शी, उपाध्यक्ष संजीव कोहली, राज सिंह, ममता देवी, शशिपाल, मंगू राम मौजूद रहे।
बिजली बिल का भुगतान करने वाला आदेश वापस ले सरकार : कश्मीरी पंडित
जम्मू। राहत शिविर में रहने वाले कश्मीरी पंडितों को अब बिजली बिल का भुगतान करना होगा। सरकार के इस आदेश का कश्मीरी पंडित विरोध कर रहे हैं। शनिवार को माइग्रेंट एक्शन कमेटी कैंप ने प्रेस वार्ता कर सरकार से आदेश वापस लेने की मांग की। कमेटी के सदस्यों ने कहा कि 32 साल से कश्मीरी पंडित विस्थापन का जीवन जी रहे हैं। सरकार लोगों को राहत देने की बजाय आर्थिक बोझ डाल रही है। प्रशासन अपना फैसला वापस ले। सरकार बिजली बिल लेने की बजाय कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी को लेकर प्लान बनाए। प्यारे लाल पंडित ने कहा कि बिल के भुगतान को लेकर सरकार का आदेश दुखद है। सरकार ने ऐसी कोई व्यवस्था शुरू करनी थी तो कश्मीरी पंडितों से बातचीत करनी चाहिए थी। सरकार ने ये आदेश हम पर थोपा है। विस्थापितों का सारा खर्च केंद्र सरकार उठाती है। 2018 में भी ऐसे हुआ था। अब चार साल बाद फिर जानबूझ कर इसे लागू किए जाने की बात कही जा रही है। ब्यूरो