रियासी। भूस्खलन से प्रभावित हुए तलवाड़ा के विस्थापितों ने माइग्रेंट एक्शन कमेटी के बैनर तले शुक्रवार को चार घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। सुबह लोग क्लब परिसर में इकट्ठा हुए और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन उन्हें सुविधाएं देने की बजाय उन पर कार्रवाई करने की योजना बना रहा है। वह पिता को विस्थापित मानता है लेकिन पुत्र को नहीं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने उनकी कोई सुध नहीं ली है। इसके विपरीत उनकी सूचियां तैयार कर प्रशासन बिना वजह उन्हें तंग कर रहा है। विस्थापितों ने कहा कि वे लोग यहां 25 वर्षों से रह रहे हैं। आतंकवाद के चलते वह अपने घर, जमीन, जायदाद छोड़कर आए थे। यहां उनके बच्चे पैदा हुए, उनकी परवरिश भी खस्ताहाल आवासों में की और तलवाड़ा में बने स्कूलों में जहां तक संभव हो सका उन्हें शिक्षा भी दी गई।
उन्होंने कहा कि दिहाड़ी लगाकर अपने परिवार का पालन पोषण किया है। अब प्रशासन उनके बच्चों को विस्थापित मानने से इंकार कर रहा है। तैयार की जा रही सूचियों में से उनके नाम हटाए जा रहे हैं। बाप को विस्थापित जबकि बेटे को विस्थापित नहीं मान रहे हैं। उन्हें आवास खाली करने को कहा जा रहा है। इस दौरान प्रधान जगदेव सिंह और देव राज ने कहा कि प्रशासन अपने असली मुद्दे से भटक रहा है। बेघर हुए लोगों को सुविधाएं देने की बजाय उन पर कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पीड़ितों को जिस स्थान पर शरण दी गई है, वहां लोग भेड़ बकरियों की तरह दिन गुजारने को मजबूर हैं। प्रशासन ने अगर जल्द ही उनकी सुध नहीं ली तो वे सड़क पर उतर आएंगे। विस्थापितों ने सभी को एक समान सुविधाएं देने की मांग करते हुए तलवाड़ा में बने सभी आवासों को ठीक करने को कहा। यह धरना प्रदर्शन सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक चला।