-लेह में सोनम वांगचुक की हड़ताल 15वें दिन भी जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग के समर्थन में बुधवार को हजारों लोगों ने कारिगल में विशाल रैली निकाली। इस दौरान दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। इस बीच पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 15वें दिन में प्रवेश कर गई।
वांगचुक के समर्थन में कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए) के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोगों ने फातिमा चौक से हुसैनी पार्क तक एक रैली निकाली। मुख्य बाजार में प्रदर्शन किया। पूर्ण राज्य और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग करते हुए नारे लगाए। जुलूस में भाग लेने वाले लोगों ने अपने हाथों में इन दोनों मांगों के अलावा लद्दाख बचाओ, लोकतंत्र बचाओ लिखी तख्तियां ले रखी थीं। रैली का नेतृत्व
लेह अपेक्स बॉडी(एलएबी), कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए), विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के अलग-अलग समूह विभिन्न मांगों के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। दोनों समूह पिछले चार वर्षों से लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और इसे संविधान की छठी अनुसूची के तहत शामिल करने की मांग कर रहे हैं।
केडीए आज जाएगा लेह, 24 से करेगा भूख हड़ताल
रैली में शामिल केडीए नेताओं ने हुसैनी पार्क में एक विशाल सभा को संबोधित किया और लोगों से केंद्र के साथ अपनी वार्ता की विफलता के बाद लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहने का आग्रह किया। उन्होंने 24 मार्च से कारगिल में भूख हड़ताल शुरू करने की भी घोषणा की।
केडीए के सह-अध्यक्ष अली करबलाई ने रैली के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा, हम बातचीत के माध्यम से अपनी मुख्य मांगों का समाधान चाहते हैं लेकिन केंद्र सरकार ने हमारी दोनों मुख्य मांगों - राज्य का दर्जा और (छठी अनुसूची के तहत शामिल) - को चार मार्च को अस्वीकार कर बातचीत के दरवाजे बंद कर दिए, जिससे लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। करबलाई ने कहा कि केडीए नेतृत्व वीरवार को लेह रवाना हो रहा है और एलएबी के साथ आंदोलन की संयुक्त रणनीति पर चर्चा करेगा।
ग्लेशियरों को बचाना सिर्फ लद्दाख के लोगों का विषय नहींः सोनम
लेह में, वांगचुक ने कहा कि वह सिर्फ पानी और नमक पर जीवित रह सकते हैं। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, मेरे साथ 125 लोग खुले आसमान के नीचे (माइनस 11 डिग्री सेल्सियस में) भूखे पेट सोए। लद्दाख के ग्लेशियरों को बचाना अकेले लद्दाख के लोगों के लिए चिंता का विषय नहीं है। वांगचुक ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि भूख हड़ताल का उद्देश्य केंद्र को लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी और इसकी अनूठी स्वदेशी जनजातीय संस्कृति की रक्षा करने के वादे की याद दिलाना है।
लद्दाख की मांगों पर ध्यान दे केंद्र: तारिगामी
श्रीनगर। मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने बुधवार को कहा, केंद्र को लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत शामिल करने की मांग पर ध्यान देना चाहिए। हम लद्दाख के लिए एक साझा इतिहास और चिंताओं को साझा करते हैं, जो इसके लोगों की आकांक्षाओं के साथ गहराई से मेल खाता है। जम्मू-कश्मीर के लोग कभी नहीं चाहते थे कि लद्दाख अलग हो। एजेंसी