जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने सोमवार को कक्षाओं व प्रयोगशालाओं का बहिष्कार किया। इसके बाद बैठक कर विभिन्न मुद्दों पर मंथन किया। यह जानकारी शोधार्थी अनुरुद्ध और दिनेश ने दी है। उन्होंने कहा कि हाल में उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किया है। इसमें सरकार ने पीएचडी का मूल्य कम कर सिर्फ तीन अंक रखे हैं, जबकि यूजीसी के नियम के अनुसार पीएचडी के 25 अंक रखे गए हैं।
शोधार्थियों का कहना है कि प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए सरकार ने नया तुगलकी फरमान जारी किया है। इसका जम्मू ही नहीं कश्मीर विश्वविद्यालय के शोधार्थी भी विरोध कर रहे हैं। अनिरुद्ध का कहना है कि प्रदेश सरकार ने जानबूझकर ऐसी नीति तैयार की है। इसका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भी विरोध कर रहे हैं। आने वाले समय में पीएचडी में शोध के लिए कोई भी तैयार नहीं होगा।
शोध के अंक कम कर लिखित परीक्षा के अंकों को प्राथमिकता दी गई है। दिनेश ने कहा कि पीएचडी का उन्हें लाभ नहीं देना था तो इसे रखा क्यों गया था। कई शोधार्थी, तीन से पांच साल तक समय शोध में व्यतीत करते हैं।कुछ दिनों के भीतर न्याय नहीं मिला तो पीएचडी छोड़ देंगे। छह अक्तूबर को विश्वविद्यालय से लेकर राजभवन तक शांतिपूर्वक मार्च निकालेंगे। विवि अनुदान आयोग के चेयरमैन, शिक्षा मंत्री, सहित अन्य को पत्र की मूल प्रति भेजकर उन्हें प्रदेश सरकार की युवा विरोधी नीतियों से अवगत करवाएंगे।