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एलजी साहब, सौ-पांच सौ रुपये मासिक वेतन में गुजारा असंभव

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जम्मू। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत पार्ट टाइम सफाई कर्मियों ने लंबित मांगों के समर्थन में मंगलवार को प्रदर्शनी मैदान के बाहर प्रदर्शन कर आवाज को बुलंद किया। इस दौरान न्न्यूनतम मजदूरी अधिनियम लागू करने, समान वेतन समान काम और नियमितीकरण के लिए जल्द उचित नीति बनाने की मांग उठाई है। उन्होंने उपराज्यपाल से गुहार लगाते हुए कहा कि सौ और पांच सौ रुपये में गुजारा चलाना मुश्किल है।
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कर्मचारियों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य विभाग में 510 सफाई कर्मचारियों को हाफ और फुल टाइम पर लगाया गया था। लेकिन समय के साथ सेवा घंटों में लगातार वृद्धि की गई और अब अधिकांश फुल टाइम सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन इसके एवज में उन्हें 100, 500, 1000, 1500 रुपये तक का वेतन दिया जा रहा है। सफाई कर्मी रोमेश कुमार कलोत्रा ने कहा कि कई सफाई कर्मचारी 20 से 28 साल से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनके नियमितीकरण के साथ वेतनमान बढ़ाने के बारे में किसी ने नहीं सोचा। महंगाई के दौर में सफाई कर्मियों को परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो रहा है। मौजूदा वेतन से परिवार चलाना मुश्किल है। कई बार वेतन बढ़ाने के लिए विभागीय उच्चाधिकारियों से आग्रह किया गया है, लेकिन सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने उप राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप कर इंसाफ दिलाने की मांग की है। वहीं, चेतावनी दी कि अगर मांगों पर शीघ्र गौर नहीं किया गया तो वे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हाेंगे।
सफाई कर्मियों ने बयां किया दर्द
प्रदर्शन में शामिल तोषी देवी ने बताया कि वह 22 साल से विभाग में सेवाएं दे रही हैं। शुरू में 100 रुपये प्रति माह मिलते थे, जिसे बढ़ाकर 500 रुपये तक किया गया। इतने कम पैसों में निर्वाह करना मुश्किल है। कर्मी कहर सिंह ने कहा कि 23 साल से काम कर रह हूं और वेतन 1000 रुपये प्रति माह है। कुछ कर्मियों का 100 तो कुछ का 500 रुपये प्रति माह है। इससे घर का गुजारा चलाना मुश्किल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना काल में सफाई कर्मी सम्मान दिया था। पूरे देश को उनके महत्व के बारे में बताया था, लेकिन प्रदेश में कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है। कर्मचारी रमेश कुमार ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों के लिए संघर्ष रहे हैं। उप राज्यपाल से मांग है कि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम को लागू किया जाए। समान वेतन व भत्ता दिया जाए। साथ ही एक नियामक नीति के तहत उन्हें पार्ट टाइम सफाई कर्मी से फुल टाइम कर्मी बनाया जाए।
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