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बिजली संशोधन बिल से कर्मी खफा

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जम्मू। बिजली संशोधन बिल को संसद में पेश करने के लिए सूचिबद्ध करने पर कर्मचारी मुखर हो गए हैं। सोमवार को जम्मू-कश्मीर से लेकर लद्दाख तक सभी जिलों में प्रदर्शन कर कार्रवाई का विरोध जताया गया है। साथ ही फैसले से पहले बिल को स्थायी समिति के पास भेजने की अपील की है।
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जम्मू-कश्मीर पावर इंप्लाइज एंड इंजीनियर काओर्डिनेशन कमेटी की ओर से बिजली संशोधन बिल 2022 का विरोध किया गया। अध्यक्ष सचिन टिक्कू ने कहा कि इससे बिजली विभाग के निजीकरण का रास्ता साफ हो जाएगा। इस पर जल्दबाजी में फैसला नहीं लिया जाना चाहिए। इसे संसद की बिजली संबंधी स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए। मुख्य हितधारकों, उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। केंद्र सरकार ने इंजीनियरों और कर्मचारियों के साथ मुद्दों पर चर्चा नहीं की है। विद्युत अधिनियम 2003 ने लाइसेंसिंग के माध्यम से उत्पादन के निजीकरण की अनुमति दी और अब प्रस्तावित विधेयक से बिजली वितरण के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त होगा। इस मौके पर जयपाल शर्मा, अशोक कुमार दुबे, जसबीर सिंह, अनिल सलाथिया, लाइनमैन और वर्कर्स यूनियन के सदस्य मौजूद रहे।
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