अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। विपक्षी पार्षदों ने शहर में विकास कार्य न करवाने और वादे के खिलाफ संपत्ति कर लगाने का आरोप लगाते हुए वीरवार को मेयर व डिप्टी मेयर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पिछले दरवाजे से कर्मियों की नियुक्तियां करने का आरोप लगाया। नगर निगम कार्यालय के बाहर पार्षदों ने प्रदर्शन कर मेयर, डिप्टी मेयर और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
आरोप लगाया कि विकास कार्यों की अनदेखी की जा रही है। वादे के विपरीत शहर में संपत्ति कर लगा दिया गया है। पिछले तीन माह से जनरल हाउस की बैठक भी नहीं हुई। प्रदर्शन में कांग्रेस के पार्षद कमल सिंह, राजिंदर सिंह जमवाल, भानु महाजन, रजनी बाला, मोहिउदीन चौधरी, रछपाल, इंद्रजीत कौर रंधावा, द्वारका चौधरी, निर्दलीय पार्षद अनीता शर्मा, शाम लाल, युद्धवीर सिंह, अमित गुप्ता, इंद्र सूदन और डीएपीए के पार्षद गौरव चोपड़ा शामिल रहे।
मेयर ने की वादाखिलाफी, पार्षदों को बात रखने के लिए कोई प्लेटफार्म तक नहीं
कांग्रेस पार्षद द्वारका चौधरी ने आरोप लगाया कि मेयर बनने के बाद राजिंदर शर्मा ने जो भी दावे और वादे किए, वे सब झूठे निकले हैं। उन्होंने कहा था कि 15 दिन के बाद जनरल हाउस की बैठक होगी, जो दो दिन तक चलेगी। लेकिन पिछले तीन महीने से कोई बैठक नहीं हुई है। पूर्व मेयर ने भी चार साल में सिर्फ 17 बार बैठक की। पार्षदों के पास अपनी बात रखने के लिए प्लेटफार्म ही नहीं है। किसी भी पार्षद को विकास के लिए फंड जारी नहीं किया गया, जो 35 लाख रुपये मिले हैं, वे भी पहले के ही दिए गए हैं। मेयर ने पार्षदों के साथ बैठक कर दावा किया था कि शहर में संपत्ति कर नहीं लगेग, लेकिन एक अप्रैल से शुल्क लगा दिया गया।
वार्डों में सफाई कर्मियों की जरूरत पूरी नहीं कर पाया निगम
पार्षद गौरव चोपड़ा ने कहा कि मेयर राजिंदर शर्मा ने कहा था कि ईमानदार जम्मू के नारे पर वह काम करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। आरोप लगाया कि निगम में पिछले दरवाजे से डेढ़ से दो लाख रुपये लेकर नियुक्तियां की जा रही हैं, जबकि सफाई कर्मियों की नियुक्तियां नहीं हो रहीं। हर वार्ड में सफाई कर्मी की जरूरत है। यह भी आरोप लगाया कि जनरल हाउस की बैठक भाजपा नेताओं के कहने पर हो रही है। भाजपा नेताओं के पास इसका कोई अधिकार नहीं। निर्दलीय पार्षद इंद्रजीत सूदन ने कहा कि हमें उम्मीद थी कि नए मेयर के आने से व्यवस्था में सुधार होगा। शहर में विकास कार्यों में तेजी आएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। पहले से भी अधिक अव्यवस्था हो गई है। सबसे बड़ा मामला संपत्ति कर का है। साथ ही जनरल हाउस की बैठक न होना भी एक बड़ा मुद्दा है।
चार महीने पहले वह मेयर बने थे। चार माह में दो बार जनरल हाउस की बैठक की गई है। रही बात संपत्ति कर की तो यह फैसला नगर निगम का नहीं है। यह फैसला केंद्रीय प्रशासनिक परिषद का है। इसमें निगम ने कुछ नहीं किया। निगम में पिछले दरवाजे से नियुक्तियों के आरोप बेबुनियाद हैं। न ऐसी कोई नियुक्ति हुई और न ही होगी। पार्षदों के आरोप कहीं न कहीं उनके निजी हिताें से जुड़े हुए हैं। इस साल हमले 107 करोड़ रुपये शहर के विकास पर खर्च किए हैं। पार्षदों को 35-35 लाख रुपये पहले भी दिए गए थे। ये लोग 70-70 लाख के और प्रस्ताव लेकर आए हैं। निजी हित के लिए कोई पार्षद ब्लैकमेल नहीं कर सकता।
- राजिंदर शर्मा, मेयर नगर निगम जम्मू