आशा वर्कर ने कहा कि पुडुचेरी, हरियाणा, केरल, तेलंगाना और गुजरात आदि राज्यों में आशा कार्यकर्ताओं को 10,000 रुपये प्रति माह वेतन मिलता है, जबकि जम्मू-कश्मीर में मात्र 2000 रुपये दिए जा रहे है।
आशा कार्यकर्ताओं ने मांगें पूरी करवाने के लिए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। उन्होंने प्रदर्शन कर सरकार से गुहार लगाई। आशा वर्कर यूनियन के बैनर तले शिष्टमंडल भाजपा नेता देवेंद्र सिंह राणा के गांधीनगर स्थित आवास पर पहुंचा। इसके बाद मंडलायुक्त कार्यालय में पहुंचकर ज्ञापन देते हुए पारिश्रमिक बढ़ाने की मांग की।
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वक्ताओं ने आशा वर्करों की वेतन विसंगतियों के बारे में बताया। कहा कि पुडुचेरी, हरियाणा, केरल, तेलंगाना और गुजरात आदि राज्यों में आशा कार्यकर्ताओं को 10,000 रुपये प्रति माह वेतन मिलता है, जबकि जम्मू-कश्मीर में मात्र 2000 रुपये दिए जा रहे हैं। न्यूनतम वेतनमान 26000 रुपये होना चाहिए।
आशा वर्कर स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण परियोजनाओं में योगदान दे रही हैं। हर साल उनका मानदेय दस हजार रुपये तक बढ़ाया जाए। इसके अलावा सभी भत्ते और सामाजिक सुरक्षा प्रावधान दिए जाएं। देवेंद्र राणा ने कहा कि कोविड काल में आशा वर्करों के महत्वपूर्ण योगदान को भूला नहीं जा सकता है।
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कोविड से लड़ाई में इन वर्करों ने अहम भूमिका निभाई है। आश्वासन दिया कि जायज मांगों को उप राज्यपाल के समक्ष उठाया जाएगा। जम्मू-कश्मीर की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में लगभग 13,000 आशा वर्कर्स हैं और कइयों ने कोविड के खिलाफ लड़ाई में अपना बलिदान दिया है। इस दौरान यूनियन से ओम प्रकाश भी मौजूद रहे।