तालाब तिल्लो, महेशपुरा चौक, जानीपुर, नरवाल सहित अन्य इलाकों से भी प्रदर्शनकारी तवी पुल पर पहुंचने के लिए मेटाडोर से निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। ज्यूल चौक में प्रदर्शन में शामिल होने दो मेटाडोर में आ रहे लोगों को वापस भेजा गया।
जम्मू स्मार्ट सिटी में स्मार्ट मीटर के विरोध में लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बुधवार को बिक्रम चौक पर बड़ी संख्या में लोगों ने हाईवे जाम कर सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। तवी पुल पर चक्का जाम करने निकले प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद ये लोग प्रदर्शनकारियों बिक्रम चौक पर करीब दो घंटे तक प्रदर्शन करते रहे। इससे बस स्टैंड से सतवारी तक और यूनिवर्सिटी रोड से आने-जाने वाले वाहन चालक व यात्री जाम में फंसे रहे। फ्लाईओवर पर भी जाम की स्थिति बनी रही।
विज्ञापन
प्रदर्शन दोपहर एक बजे शुरू हुआ, जो करीब तीन बजे तक जारी रहा। तालाब तिल्लो, महेशपुरा चौक, जानीपुर, नरवाल सहित अन्य इलाकों से भी प्रदर्शनकारी तवी पुल पर पहुंचने के लिए मेटाडोर से निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। ज्यूल चौक में प्रदर्शन में शामिल होने दो मेटाडोर में आ रहे लोगों को वापस भेजा गया। इसके बाद इन लोगों ने अपने-अपने इलाके में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल समाजसेवी अमित कपूर ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने पर काम जारी है। लेकिन लोगों को बिल अदा करना मुश्किल हो गया है। पहले एक हजार रुपये बिल आता था अब छह से सात हजार तक आ रहा है।
प्रदर्शन में भाग लेने के लिए सभी दलों को आमंत्रित किया गया, लेकिन किसी भी पार्टी से नेता नहीं पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि भाजपा से 25 विधायक चुनाव जीतकर सत्ता में आए थे, लेकिन आज कोई भी स्मार्ट मीटर का विरोध नहीं कर रहा। आम जनता की अनदेखी की जा रही है। प्रदर्शन में शामिल स्थानीय निवासी सुमन, कांता, उमेशी ने कहा कि घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल ज्यादा आ रहे हैं। कोई सुनवाई नहीं हो रही। उधर, नगरोटा में भी स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में प्रदर्शन किया।
विज्ञापन
एक सप्ताह का अल्टीमेटम
प्रदर्शनकारियों ने स्मार्ट मीटर न लगाने के लिए एक सप्ताह का अल्टीमेटम विभाग को दिया है। कहा कि फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन तेज कर देंगे। साथ ही मीटर बदलने में हो रहे घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की भी मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जम्मू-कश्मीर में भी मुफ्त बिजली मुहैया कराई जाए। अगर पंजाब और दिल्ली जैसे राज्य जम्मू-कश्मीर से बिजली खरीदकर मुफ्त बिजली दे सकते हैं तो एलजी प्रशासन जम्मू-कश्मीर के लोगों को मुफ्त बिजली क्यों नहीं दे सकता।