जम्मू। निजी स्कूलों की मनमानी के आगे अभिभावक बेबस हैं। अब स्कूलों ने टीसी का पेंच फंसा दिया है। ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) न मिलने से बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला नहीं मिल पा रहा। निजी स्कूल बिना किसी कारण अभिभावकों को समय पर टीसी नहीं दे रहे, जिससे बच्चों की पढ़ाई के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
पहले कोरोना और फिर निजी स्कूलों की मनमानी के कारण अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूल में दाखिला करवाना चाहते हैं, लेकिन कुछ निजी स्कूल टीसी नहीं दे रहे। इससे अभिभावक ही नहीं, छात्र भी परेशान हैं। शहर के लोअर रूपनगर में टिनी टॉट्स हायर सेकेंडरी स्कूल में नौवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों को अब अभिभावक सरकारी स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। लेकिन निजी स्कूल बिना किसी कारण बच्चे को टीसी नहीं दे रहा है। वहीं, जिस सरकारी स्कूल में बच्चे का दसवीं कक्षा में दाखिला करवाना है, वह बिना टीसी के दाखिला नहीं दे रहा। एक बच्चे के अभिभावक ने बताया कि 17 दिन पहले स्कूल में टीसी के लिए आवेदन किया था, अभी तक नहीं मिला है। पूछने पर स्कूल 15 मई के बाद टीसी देने की बात कर रहा है। जबकि सरकारी स्कूल एक मई तक टीसी देने को कहा रहा है। चिंता यह है कि बच्चे का वर्ष बर्बाद न हो जाए। उन्होंने कहा कि स्कूल की सभी तरह की फीस दे दी है। कुछ भी बकाया नहीं है। बावजूद इसके टीसी नहीं मिल रहा है। अभिभावक ने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं रही कि अब वह बच्चे को निजी स्कूल में पढ़ा सकें। महंगी फीस, किताबें, वर्दी आर्थिक बोझ बन रहा है। सरकारी स्कूल में भी बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकती है। बस भरोसा करने की जरूरत है। निजी स्कूलों की हर स्तर पर मनमानी चल रही है। बेहतर शिक्षा देने के नाम पर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
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कोई भी स्कूल टीसी देने से मना नहीं कर सकता और न ही हमारे स्कूल ने टीसी देने से मना किया है। परिणाम में काउंटर साइन होने में कुछ समय लगता है, जिसके कारण टीसी देने में देरी होती है। मई के पहले सप्ताह तक टीसी मिलेगी। अभिभावक जिस स्कूल में अपने बच्चे का दाखिला करवा रहे हैं, वहां हमारी बात करवा सकते हैं, ताकि बच्चे का दाखिला हो सके।
- दीपाली हांडा, प्रिंसिपल, टिनी टॉट्स हायर सेकेंडरी स्कूल