अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। निजी स्कूलों के मनमानी से अभिभावकों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। स्कूल शिक्षा विभाग के तमाम दावों के बावजूद निजी स्कूलों की लूट जारी है। निजी स्कूल ज्यादा किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर कर रहे हैं। कक्षा छठीं तक एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य हैं, लेकिन अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
शहर से 12 किलोमीटर दूर स्थित किनट ग्रीन मॉडल अकादमी संग्रामपुर में प्रबंधन ने छठी कक्षा में 12 पुस्तकें अनिवार्य की हैं। इनमें सिलेबस के तहत एनसीईआरटी की चार से पांच पुस्तकें हैं, जबकि अन्य निजी प्रकाशकों की हैं। इनकी कीमत प्रति पुस्तक 200 से 450 रुपये तक है। संग्रामपुर निवासी अभिभावक ने बताया कि बेटा छठी कक्षा में पढ़ता है। स्कूल प्रबंधन ने 12 किताबें लगाई हैं, जिनकी कीमत 4200 रुपये है। इतनी किताबें लगाने का जवाब स्कूल प्रबंधन के पास नहीं है। हर बार सिलेबस बदला जाता है, जिस कारण पिछले वर्ष की किताबों का इस्तेमाल संभव नहीं है। अभिभावक ने बताया कि मैंटल मैथमेटिक्स विद वैदिक मैथ नामक पुस्तक 200 रुपये और विजुअल आर्ट की पुस्तक 400 रुपये की है। अभिभावक परेशान हैं, लेकिन शिकायत करने से डरते हैं। निजी स्कूल मनमानी कर किताबें लगा कर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाल रहे हैं।
बच्चों को जो भी अतिरिक्त किताबें लगाई है वह उनके समग्र विकास के लिए हैं। अभिभावक चाहते हैं की उनके बच्चे हर विषय में उत्कृष्ट हों, लेकिन इसके लिए उन्हें स्कूल प्रबंधन पर भरोसा करना होगा। बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाने के प्रयास जारी हैं। फिर भी अभिभावकों को कोई शिकायत है तो वह स्कूल प्रबंधन से बात कर सकते हैं।
- दीपिका राजपूत, प्रिंसिपल, किनट ग्रीन मॉडल अकादमी, संग्रामपुर