संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। अघोषित बिजली कट से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का जीना दूभर हो गया है। मढ़ के दर्जनों गांवों में लोगों को पंखियों के सहारे दिन गुजारना पड़ रहा है। आलम यह है कि बच्चे रात को मोमबत्ती के सहारे पढ़ रहे हैं। शिकायत को लेकर लोग विभाग के पास जाते हैं तो रटा-रटाया एक ही जवाब मिलता है कि गर्मी में लोड बढ़ जाता है और पानी की कमी से बिजली का उत्पादन कम होता है। मढ़ और भलवाल ब्लॉक में करीब 10 से 12 घंटे तक बिजली गुल हो रही है जिससे जीना मुहाल हो गया है। 150 में से कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां खासमखास या नेताओं के दबदबे से बिजली की पूरी व्यवस्था है। तीन से चार ट्रांसफॉर्मर तक लगे हैं। दूसरी ओर, जिनकी पहुंच नहीं है वे दिक्कतें झेलने के लिए मजबूर हैं। करोड़ों खर्च करने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। लोगों का आरोप है कि जब भी अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया जाता है तो वे बहाना बनाकर बात टाल देते हैं। लंबे कटों से सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवतियां और कारोबारी हैं।
कम वोल्टेज से उपकरण जले
लो वोल्टेज के चलते क्षेत्र के कई घरों में बिजली के उपकरण जल गए। इस कारण लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। लोगों के मुताबिक मढ़ में 70 व 80 के बीच वोल्टेज होने से जब बिजली आती भी है तो पंखे खिलौने बनकर रह जाते हैं। बार-बार अधिकारियों को समस्या बताई गई, फिर भी परेशान हैं। दुकानदार गनेशू और आशु पंडित का कहना है - हर साल लो वोल्टेज के कारण महंगे उपकरण जल जाते हैं और मुआवजा तो दूर सुनवाई भी नहीं हो रही।
पावर स्टेशनों पर अधिकारियों के फोन नंबरों की सूची नहीं
लोगों का आरोप है - पावर स्टेशनों पर ड्यूटी देने वाले अधिकारियों के मोबाइल नंबर की लिस्ट नहीं लगाई गई। किसी अधिकारी के नंबर के बारे में जानकारी मांगों तो कहा जाता है कि नंबर उपलब्ध नहीं है या नंबर नहीं दे सकते। क्षेत्रवासी ओमप्रकाश, अनु शर्मा और अनीता शर्मा का कहना है - अगर फोन नंबर किसी तरह मिल भी जाए तो यह कहकर अधिकारी पल्ला झाड़ लेते हैं कि स्थिति के बारे में जल्द जानकारी देता हूं लेकिन बाद में फोन नहीं आता और लाइन व्यस्त कर दी जाती है। इस बारे में जब जेई राकेश लौचन से संपर्क करने की कोशिश की तो उनका फोन नहीं मिला। वहीं, जेई सतपाल ने बताया कि ग्रि़ड में दिक्कत आने के कारण बिजली बंद हुई है।