पुंछ में हमले के बाद तलाशी अभियान चलाते सेना के जवान
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पुंछ के भाटादूड़ियां का हमला आतंकियों की कोई आनन-फानन कार्रवाई नहीं हो सकती, बल्कि यह सुनियोजित था। आतंकियों ने घटनास्थल के आसपास हालात और वहां से बच निकलने के मार्ग सहित हर पहलु को जांचा परखा होगा। इतना ही नहीं दहशतगर्दों के इन नापाक इरादों को पूरा करने में क्षेत्र के जानकार किसी आतंकी मददगार का पूरा सहयोग रहा होगा।
जिसके चलते आतंकी सैन्य जवानों पर हमला कर सुरक्षित बच निकले। सुरक्षा मामलों के जानकारों और पूर्व सैनिकों के मुताबिक हमले के दिन और समय को देखा जाए तो बिना किसी जानकार की सूचना के आतंकियों को इस बात का कैसे पता चल सकता है कि उस दिन सैन्य कॉनवाय नहीं है।
मार्ग पर हर दिन तैनात रहने वाली आरओपी, क्यूआरटी नहीं है और मार्ग पर अकेला सैन्य वाहन गुजरने वाला है। इसके साथ ही हमले की जगह को देखा जाए तो जहां इसे अंजाम दिया गया, वह क्षेत्र/सड़क मार्ग भिंबर गली की तरफ से करीब डेढ़ सौ मीटर की दूरी से दिखाई देता है, जबकि पुंछ की तरफ से यह स्थान मात्र 30 से 50 मीटर की दूरी 0से ही दिखता है।
इस तरफ मार्ग पर एक बड़ा मोड़ होने के साथ ही दोनों तरफ घना जंगल है और जंगल में दोनों तरफ एक नाला भी है। आतंकियों ने इस सबको देख समझकर अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दिया कि अगर हमला करते हुए कोई अन्य सैन्य वाहन या टुकड़ी जवाबी कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंच जाती है तो वे जंगल और नाले की आढ़ में भाग सकें।
उस दिन भारी बारिश और धुंध का भी आतंकियों ने फायदा उठाया। हालांकि आतंकी हमले की जांच या किसी मददगार के सुरक्षाबलों के हाथ लगने के बाद ही पूरी साजिश का खुलासा होगा।