पुंछ-राजोरी के जंगलों में सुरक्षाबलों को 18 महीनों से चकमा दे रहे आतंकी हाईटेक तकनीक से लैस हैं। आतंकी इतने शातिर हैं कि वह ऑफलाइन चलने वाले अल्पाइन मोबाइल एप का इस्तेमाल कर जंगली इलाकों में आसानी से छिप रहे हैं। साथ ही आसानी से भागने में भी कामयाब हो रहे हैं।
खुफिया सूत्रों के अनुसार, आतंकी पहले सेटेलाइट का फोन इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब उच्च तकनीक युक्त एप का इस्तेमाल कर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। साथ ही वह पहले अपने रूट को उक्त एप में सेव कर लेते हैं, जिसकी मदद से वारदात को अंजाम देकर सुरक्षित ठिकाने तक पहुंच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार आतंकियों ने कई ऐसे रूट उन गुफाओं तक बना लिए हैं, जो उनके लिए सुरक्षित हैं।
वह इन गुफाओं तक पहुंचने के लिए पहले रेकी करते हैं। इसके बाद उक्त एप की मदद से वारदातों को अंजाम कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंच रहे हैं। यही कारण है कि ढांगरी, भाटादूड़ियां और केसर हिल में वारदात को अंजाम देने के बाद आतंकी अभी तक पकड़ से बाहर हैं।
ऐसे काम करता है एप
अल्पाइन मोबाइल एप ऑफलाइन मोड से चलता है। यह गूगल अर्थ का उन्नत वर्जन है। इसका इस्तेमाल अमूमन जंगलों, नदियों और पहाड़ों में एडवेंचर टूर और ट्रैकिंग करने वाले लोग इस्तेमाल करते हैं। एप के जरिए किसी भी निर्धारित रूट को पहले से सेव करने का भी विकल्प है। इसकी मदद से किसी भी पहाड़, नदी या फिर जंगल के रास्ते से बाहर निकला जा सकता है।
हाल ही में बंद की गई थी 14 एप
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 14 माेबाइल एप को केंद्रीय गृह विभाग प्रतिबंधित कर चुका है। इनमें क्रायपवाइज़र, एनिग्मा, सेफस्विस, विकरमे, मीडियाफायर, ब्रियर, बीचैट, नंदबॉक्स, कोनियन, आईएमओ, एलिमेंट, सेकेंड लाइन, ज़ंगी और थ्रेमा शामिल हैं। कई आतंकी इन एप के जरिये गतिविधियां चला रहे थे।