सांबा। बसंतर दरिया में सैकड़ों मछलियों की मौत मामले में कारखानों को जिम्मेदार माना जा रहा है। दरिया से सटे से औद्योगिक क्षेत्र सिडको फेज-प्रथम में 200 कारखानों में से मात्र 31 ऐसे हैं जिनमें इफुलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगा है। इनमें में कई इकाइयां ऐसी हैं जिनमें प्लांट खराब हैं और वे पानी को शुद्ध करके दरिया में फेंकने की बजाय, सीधे फेंक दे रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ऐसी इकाइयों के खिलाफ करने की तैयारी की है।
उल्लेखनीय है कि दो पूर्व बसंतर दरिया में सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई। इस मामले में माना जा रहा है कि दरिया के किनारे स्थित कारखानों से जहरीला पानी (बिना शुद्ध किए) सीधे दरिया में फेंका जा रहा है। जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियम अनुसार जिन इकाइयों से केमिकल युक्त पानी फेंका जा रहा है उनमें ईटीपी लगाना जरूरी है और पानी को शुद्ध करने के बाद ही फेंका जाए। माना जा रहा है कि मछलियों की मौत औद्योगिक इकाइयों से बिना शुद्ध किए ही पानी दरिया में फेंका गया है, जिससे मछलियों की मौत हुई है। मछलियों के मरने को लेकर स्थानीय लोगों में भी रोष बनने लगा है। लोगों ने इस की जांच करवाए जाने को लेकर अपनी आवाज को बुलंद की है। यही नहीं यदि सही ढंग से जांच नहीं की गई तो लोग सड़कों पर आने को मजबूर हो जाएंगे।
उधर प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कारखानों में लगाए गए इटीपी प्लांट की जांच की जा रही है, कि चालू हालत में हैं या बंद हैं। ऐसे में यदि कोई कारखाना प्रबंध दोषी पाया गया तो उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने को कहा गया है।
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केमिकल कारखानों के कारण टांडा बुर्ज क्षेत्र के किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। पहले सब्जी का अच्छा कारोबार होता था, लेकिन प्रदुषण के कारण सब्जियों का उत्पादन कम हो गया है।
-नीलम सिंह, स्थानीय निवासी सांबा।
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सिडको प्रथम फेज में केमिकल कारखाना प्रबंधन वेस्ट पानी को खुले में छोड़ देता है, जो बसंतर दरिया में मिलता है। ऐसे में केमिकल युक्त पानी से मछलियां मर रही हैं। ऐसे कारखानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
-मनोज कुमार टोनी, स्थानीय निवासी, सांबा।
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कस्बे में कुछ केमिकल कारखानों का गंदा पानी बसंतर दरिया में मिल रहा है। इसके लिए पहले भी जिला प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन उचित कदम नहीं उठाया गया है। प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड को भी इस ओर उचित कदम उठाना चाहिए।
-अरुण सिंह, स्थानीय निवासी, सांबा।
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सांबा के सिडको फेज प्रथम में 200 कारखाने हैं। इनमें 31 में लगे ईटीपी प्लांट चालू हालत में हैं। उनकी ओर से पूरी जांच की जा रही है। पानी के सैंपल लेकर लैब में भेजे हैं। विभाग की ओर से सभी कारखानों की जांच की जा रही है। जम्मु से भी टीम कारखानों में पहुंच कर जांच में जुटी है। कुछ कारखाने पानी को ट्रीट कर छोड़ते हैं। उनसे नुकसान नहीं होता है। फिर भी विभाग की ओर से कारखानों की जांच की जा रही है।
-दीपक अबरोल, अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सांबा।