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जम्मू वाले गलती से उनके प्रचार में फंस गए, हमें मिलकर काम करना है : फारूक

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- बोले- केंद्र के सहयोग की भी जरूरत, हम राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि गठबंधन को जम्मू के लोगों का दिल जीतने और वहां फैलाए गए झूठे प्रचार से उबरने की जरूरत है। जम्मू के लोगों को बताया गया कि पत्थरबाजी शुरू हो जाएगी और आतंकवाद बढ़ जाएगा, लेकिन उन्हें यह एहसास नहीं हुआ कि उनकी जमीनें छीन ली गई हैं, नौकरियां छीन ली गई हैं, सब कुछ खत्म हो गया है। वे फिर भी उनके प्रचार में फंस गए। हम उनके दिलों से इस प्रचार को मिटाना चाहते हैं। हम समृद्धि में रहना चाहते हैं। हमारे सामने कई बड़ी समस्याएं हैं जिनका हमें मिलकर सामना करना है। इसमें हमें केंद्र सरकार से सहयोग की जरूरत है।
राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए ताकि सरकार काम कर सके। आखिरकार, यह भारत का मुकुट है। अगर ताज नहीं चमकेगा तो देश कैसे चमकेगा। अब्दुल्ला ने इस बात पर सहमति जताई कि ऐसी आशंकाएं हैं कि केंद्र शासित प्रदेश में सरकार के पास सीमित शक्तियां हो सकती हैं। उन्होंने कहा, इसलिए हम राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं ताकि सरकार काम कर सके। उन्होंने कहा कि सरकार गठन को लेकर गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के साथ कोई मतभेद नहीं है। उधर, जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) ने सरकार गठन के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) को समर्थन दिया है।
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कांग्रेस ने विधायक दल के नेता का फैसला दिल्ली पर छोड़ा



एआईसीसी महासचिव गुलाम अहमद मीर, निजामुद्दीन भट, पीरजादा मोहम्मद सईद, इरफान हफीज लोन और इफ्तिखार अहमद सहित छह विजेता प्रत्याशियों की बैठक यहां एमए रोड स्थित पार्टी मुख्यालय में हुई। कर्रा ने कहा कि पार्टी ने सरकार गठन के लिए नेकां को समर्थन दिया है और समर्थन पत्र नेकां नेतृत्व को सौंप दिया जाएगा। कर्रा ने कहा, आज हमारी कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई जिसमें हमने सर्वसम्मति से केंद्रीय नेतृत्व को कांग्रेस विधायक दल के नेता के बारे में फैसला लेने का अधिकार देने का फैसला किया। हमने इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव पारित किया है और इसे फैसला लेने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया गया है। यह पूछे जाने पर कि निर्णय पार्टी हाईकमान पर क्यों छोड़ा गया, कर्रा ने कहा कि सीएलपी नेता के चयन पर कोई मतभेद नहीं है, लेकिन, कांग्रेस में ऐसा करने की एक मिसाल है। कांग्रेस में यह कुछ भी असामान्य नहीं है।
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नेकां को बिना मांगे दिया समर्थन, उन्होंने नेता चुन लिया तो हम टिप्पणी नहीं करेंगे : कर्रा



जेकेपीसीसी प्रमुख ने कहा कि उन्होंने नेकां को बिना किसी मांग समर्थन दिया है। पार्टी लोगों की बेहतरी के बड़े उद्देश्य के लिए इंडी गठबंधन की भावना को बरकरार रखना चाहती है। निर्दलीयों के समर्थन से नेकां के पास पहले से ही बहुमत होने के बारे में पूछे जाने पर कर्रा ने कहा कि गठबंधन की भावना संख्या के खेल से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा, भावना अलग है, यह अखिल भारतीय भावना है। यह जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं है। इसकी उपयोगिता पूरे भारत के लिए है। यह मंत्री पद का मुद्दा नहीं है। यह भाजपा के खिलाफ हमारी लड़ाई है। यह पूछे जाने पर कि क्या पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में स्वीकार करती है, कर्रा ने कहा कि जब नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपना नेता चुन लिया है, तो हमें टिप्पणी क्यों करनी चाहिए। वह हमें स्वीकार्य हैं, यह उनकी पसंद है। गौरतलब है कि इस बैठक के बाद कर्रा, गुलाम अहमद मीर और भरत सोलंकी डॉ. फारूक के आवास पर समर्थन पत्र लेकर गए और बाद में देर शाम करीब साढ़े सात बजे उमर अब्दुल्ला का काफिला राज भवन की ओर रवाना हुआ।
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