जम्मू। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अमनदीप सिंह को भ्रष्टाचार मामले में अदालत ने शर्तों के साथ पूर्ण जमानत दी है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश रजनीश ओसवाल ने अमनदीप सिंह की याचिका पर सुनवाई की। जमानत के साथ पुलिस को न्यायालय की अनुमति के बिना चालान पेश न करने का निर्देश भी दिया।
एडवोकेट एके साहनी और असीम साहनी ने एएनटीएफ में तैनात इंस्पेक्टर अमनदीप सिंह के खिलाफ काजीगुंड (कश्मीर) पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए भी याचिका दायर की थी। वकीलों ने दलील दी कि जांच के दौरान कुछ उच्च पुलिस अधिकारियों ने मामले में याचिकाकर्ता द्वारा की जा रही एनडीपीएस जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया तथा आरोपी को न पकड़ने के लिए कहा, जिसे एएनटीएफ तथा अमनदीप सिंह ने अस्वीकार कर दिया। तब यह प्रतिष्ठा, अहंकार श्रेष्ठता का मामला बन गया तथा इस प्रकार याचिकाकर्ता के खिलाफ जबरन वसूली का झूठा मामला दर्ज किया गया तथा बाद में पीसी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं। साहनी ने काजीगुंड पुलिस के भ्रष्टाचार विरोधी मामला दर्ज करने के मूल अधिकार क्षेत्र तथा पीसी एक्ट मामले की जांच करने की उसकी क्षमता को चुनौती दी, जो एसीबी का एकमात्र अधिकार क्षेत्र है। अदालत के समक्ष आगे तर्क दिया कि यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। काजीगुंड थाने के एसएचओ को खुद एनडीपीएस मामले में दिए गए बयान में घसीटा गया है। मामले की प्रारंभिक जांच की आवश्यकता है तथा राजपत्रित अधिकारी द्वारा इसकी जांच की जानी चाहिए। जेएनएफ