श्रीनगर। डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) के प्रमुख गुलाम नबी आजाद ने बुधवार को कहा कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने और यहां रहने वाले लोगों की भूमि और नौकरी के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रखने के लिए लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है। आजाद ने 2022 में कांग्रेस छोड़ दी थी। आजाद ने प्रेसवार्ता में कहा, यह जम्मू-कश्मीर के किसी भी हिंदू, मुस्लिम, सिख, गुज्जर या पहाड़ी को स्वीकार्य नहीं होगा। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए एक सांसद के रूप में अपने 40 वर्षों के अनुभव और प्रभाव का उपयोग करेंगे। आजाद ने कहा, मैंने राज्यसभा में देश के लोगों के लिए लड़ाई लड़ी है, चाहे वह कांग्रेस सरकार हो या भाजपा सरकार। अनुच्छेद 370 हटने के बाद उन्होंने एक महीने तक संघर्ष किया। नतीजा यह हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह राज्य का दर्जा बहाल करने पर सहमत हुए। मुझे लगता है कि इस लड़ाई को तार्किक निष्कर्ष तक नहीं पहुंचाया गया है।
उमर अब्दुल्ला द्वारा चुनाव लड़ने के लिए आजाद की पसंद पर आश्चर्य व्यक्त करने पर अनुभवी राजनेता ने कहा, यह मेरा राज्य है। किसी के लिए भी यह कहना गलत होगा कि आप बाहरी हैं... हम सभी भारतीय हैं। मैंने अपना पहला चुनाव महाराष्ट्र से लड़ा, दूसरा और तीसरा चुनाव भी महाराष्ट्र से ही लड़ा... उमर शायद उस समय स्कूल में थे। यहां (जम्मू-कश्मीर) हम आसपास के जिलों के बारे में बात कर रहे हैं। मैं किसी के रास्ते में नहीं आ रहा हूं। अगर किसी को इसके कारण कठिनाई होती है, तो मैं क्या कर सकता हूं? इस आरोप पर कि वह भाजपा सहित किसी भी पार्टी से हाथ मिला सकते हैं, आजाद ने कहा, जो गुलाम बनना चाहते हैं (लोगों के) जो शरण की तलाश में हैं। मैं नबी (पैगंबर) का गुलाम हूं और मुझे किसी के साथ जाने की जरूरत नहीं है।