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जम्मू-कश्मीर में पीएजीडी का खेल खत्म प्रभावित होगा इंडिया गठबंधन : भाजपा

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राजनीतिक विशेषज्ञ रशीद राहिल ने कहा, इस बिखराव का तीसरी पार्टी को मिल सकता है लाभ
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अमृतपाल सिंह बाली



श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक गलियारों में शोर मच गया है। यह शोर पीएजीडी के प्रमुख दो राजनीति दलों - नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के प्रमुखों द्वारा एक-दूसरे पर शब्दों के तीखे वार के बाद शुरू हुआ है। भाजपा इस मतभेद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कश्मीर दौरे में जुटी भीड़ के बाद दो दलों की निराशा का नतीजा बता रही है। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर के अनुसार, यह पीएम मोदी के कदमों की आहट थी, बीते दिनों पीएम की रैली में उमड़े जन सैलाब ने पीएजीडी को ताश के पत्तों की तरह बिखेर दिया। अल्ताफ के अनुसार, यह संकेत आने वाले वक्त का है कि कश्मीर के लोगों ने सेल्फ रूल, ऑटोनोमी, 370, 35ए, को नकार दिया और वो विकास के साथ हैं। भाजपा को कहा, पहले भी भाजपा इन राजनीतिक दलों को चुनौती नहीं मानती थी। आरोप लगाया कि कश्मीरियों के साथ इन्होंने दोखा किया है। यहां के नौजवानों की जिंदगी से खिलवाड़ किया, लेकिन 2019 के बाद पीएम मोदी ने कश्मीरियों के जख्मों पर मलहम लगाना शुरू किया और जो स्कीमें लाई, उसका यह नतीजा है कि भारी संख्या में लोग उन्हें सुनने के लिए लोग घरों से बाहर निकले। भाजपा नेता ने कहा, आने वाले चुनावों में जम्मू, उधमपुर, बारामुला, अनंतनाग और श्रीनगर की सीटों पर भाजपा क्लीन स्वीप करके दिखाएगी।
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इस बीच राजनीतिक विशेषज्ञ रशीद राहिल ने कहा, जब पीएजीडी बनी थी तब भी हमने यह बात कही थी और लिखा था कि दरिया के दो किनारे जब मिलेंगे तो एक तूफान उठेगा और आज साबित हुआ कि यह दो अलग-अलग किनारे हैं, एक साथ नहीं मिल सकते। राहिल ने यह भी कहा कि जो पहले केंद्रीय दलों का मुकाबला यहां के क्षेत्रीय दलों के साथ होता था, लेकिन गठबंधन (पीएजीडी) के बाद उन्हें एक ही दल के साथ मुकाबला करना था, लेकिन अब जब पार्टियां अलग-अलग हो जाएंगी तो इसका लाभ तीसरी पार्टी को मिल सकता है।
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