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Jammu News: कांग्रेस-नेकां में गठबंधन होगा या नहीं, सबकी निगाह इसी पर

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-कुछ दल जम्मू तो कई कश्मीर संभाग में मजबूत, अकेले बहुमत पाना आसान नहीं
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अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में 10 वर्ष के अंतराल के बाद विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा है। लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अच्छे प्रदर्शन के लिए कमर कस ली है। राजनीतिक दलों में नेताओं के शामिल होने और इस्तीफा देने का क्रम जारी है। इस बीच राजनीतिक गलियारों में नेकां-कांग्रेस की बीच चल रही गठबंधन वार्ता चर्चा बनी हुई है। राहुल गांधी और खरगे के कश्मीर दौरे के परिणाम पर सबकी निगाहें हैं।
विधानसभा चुनाव में मौके की नजाकत को भांपते हुए खुद विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर पहले दिन घाटी पहुंच चुके हैं। जम्मू-कश्मीर में चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने स्पष्ट कर चुके हैं कि वह अपने बलबूते पर चुनाव लड़ेंगे। गठबंधन पर कांग्रेस और नेकां दोनों ने खुलकर कुछ भी नहीं कहा है।राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो जम्मू-कश्मीर में अभी तक के माहौल में किसी पार्टी को अकेले को बहुमत मिलना आसान नहीं है। इसका कारण यह है कि किसी पार्टी की जम्मू तो किसी की कश्मीर संभाग में पकड़ है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गठबंधन एक उम्मीद जगा सकता है। जानकारों के अनुसार कश्मीर घाटी में नेशनल कांफ्रेंस भले कांग्रेस के मुकाबले अच्छी स्थिति में हो लेकिन बहुतमत के आंकड़े को छूना इनता आसान नहीं है। बहुतम के रास्ते में पीडीपी, डीपीएपी, पीसी और रशीद की इत्तेहाद पार्टी भी रोड़ा है।
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भाजपा के साठ गांठ की चर्चाओं पर भी नेकां लगाना चाहती है विराम
राजनीति के जानकारों का मानना है कि नेकां की कांग्रेस के साथ गठबंधन एक मजबूरी भी हो सकता है। फारूक पर दायर आय से अधिक संपत्ति का केस खत्म होने के बाद लोगों में ये चर्चे थे कि नेकां ने अंदरखाते भाजपा से हाथ मिला रखा है। इन चर्चाओं पर विराम लगाने के लिए भी नेकां गठबंधन के रास्ते पर बढ़ रही है, ताकि लोगों में साख बनी रही। चर्चा है कि कांग्रेस-नेकां के बीच अगर गठबंधन होता है, तो संभावना है कि राहुल खुद मीडिया के सामने इसकी घोषणा करें। अब ऊंट किस करवट बैठता है यह आने वाला समय ही बताएगा।
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