-लालू प्रसाद की टिप्पणी से जताई असहमति,कहा- ऐसी टिप्पणियां उलटी पड़ जाती हैं
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत हमले विपक्ष के लिए उलटा असर डालते हैं, और उनके परिवार के बारे में नारे केवल आत्म-लक्ष्य हासिल करते हैं। उमर अब्दुल्ला ने यह टिप्पणी आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के प्रधानमंत्री पर बिना परिवार वाले होने के तंज के बारे में एक सवाल के जवाब में की।
इंडिया गठबंधन का हिस्सा उमर ने कहा कि ऐसी बातें पिछले चुनाव में चौकीदार चोर है नारे की तरह ही उलटा असर करती हैं। उन्होंने कहा, मैं कभी भी ऐसे नारों के पक्ष में नहीं था और न ही इनसे हमें कोई फायदा होता है। दरअसल, जब हम ऐसे नारे लगाते हैं तो इससे हमें ही नुकसान होता है। एक मतदाता इन नारों से संतुष्ट नहीं है, वह जानना चाहता है कि आज उसके सामने जो समस्याएं हैं उनका समाधान कैसे किया जाएगा।
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जनता को रोजगार, कृषि जैसे मुद्दों से सरोकार
उमर अब्दुल्ला ने कहा, मतदाता रोजगार सृजन, कृषि संकट से निपटने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फिर से सक्रिय करने के बारे में जानना चाहते हैं, बजाय इसके कि किसी का परिवार है या नहीं। ऐसे नारों से हमने उन्हें ( मोदी) एक खुला मैदान दे दिया। मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि हमें ऐसी निजी राजनीति नहीं करनी चाहिए बल्कि जनता के मुद्दे उठाने चाहिए। चौकीदार, अडानी-अंबानी, रफेल, परिवार - ये काम नहीं करते हैं।
सभी को सीट मांगने का अधिकार : मोंगा
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) के उपाध्यक्ष गुलाम नबी मोंगा ने नेकां और पीडीपी के बीच बयानबाजी पर कहा कि सभी मुद्दे बातचीत से सुलझ जाते हैं। किसी ने कभी नहीं सोचा होगा कि कांग्रेस और आप एक साथ आएंगे। इसलिए हर मुद्दे को बातचीत से सुलझाया जाता है। नेकां को चार या पांच सीटों पर भी दावा करने का अधिकार है, लेकिन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की सभी छह सीटों पर चर्चा चल रही है। एक या दो दिन में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। नेकां और पीडीपी दोनों हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं।
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नेकां का फैसला अवाम की उम्मीदों को झटका : महबूबा
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा, नेकां का फैसला निराशाजनक है। जम्मू-कश्मीर के लोगों की उम्मीदों को झटका है। आप देख सकते हैं कि किसने गठबंधन तोड़ा है। हमने नहीं तोड़ा।
पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, पीएजीडी एक अनोखा गठबंधन था, इसे टूटते हुए देखना निराशाजनक है। मुझे अफसोस है कि हमने पांच साल तक जो गठबंधन पोषित किया वह बिखर गया। कहा,अगर नेकां नेतृत्व ने उनके साथ इस मुद्दे पर चर्चा की होती तो पीडीपी नेकां को घाटी की सभी तीन सीटों पर चुनाव लड़ने दे सकती थी। पीएजीडी के अंदर छोटे-छोटे मुद्दों पर चर्चा होती थी, लेकिन एनसी ने हमसे सलाह किए बिना फैसला ले लिया। उन्होंने कहा, पीडीपी नीचे हो सकती है, लेकिन हम बाहर नहीं हैं। हम लोगों के पास जाएंगे और अपना पक्ष रखेंगे क्योंकि संसद में आवाज उठाना वास्तव में महत्वपूर्ण है।