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Jammu News: नेकां को मिला अमृत, खाली हाथ रही कांग्रेस, नहीं भाया गठबंधन

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- जम्मू-कश्मीर के पिछले नौ बार के विस चुनावों में कांग्रेस का अब तक का न्यूनतम प्रदर्शन
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- 2014 की तुलना में इस बार मत प्रतिशत गिरा, 37 में से छह में ही जीत मिली
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में दस साल के बाद हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को नेकां के साथ गठबंधन रास नहीं आया। इस बार जहां नेकां के हाथ में अमृत आया है, वहीं कांग्रेस अपेक्षा के मुताबिक काफी हद तक खाली हाथ रही। पार्टी अपने दम पर 37 सीटों में से मात्र छह में ही जीत हासिल कर पाई है। इनमें जम्मू संभाग से एक और कश्मीर संभाग से पांच सीटें हैं। जम्मू-कश्मीर के पिछले नौ विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का यह न्यूनतम प्रदर्शन रहा है।
इससे पहले 1996 के चुनाव में पार्टी को 7 सीटें मिली थीं। 2014 की 12 सीटों की तुलना में तुलना में इस बार कांग्रेस के मत प्रतिशत के साथ सीटों में गिरावट आई है। हालांकि पिछली बार की चार सीटों की तुलना में कश्मीर में कांग्रेस इस बार पांच सीटें जीतने में कामयाब रही है, लेकिन जम्मू संभाग में पांच सीटों के बजाय सिर्फ एक ही मिली है। 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 87 सीटों में से 86 पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। इनमें चार सीटें लद्दाख की शामिल थीं। पार्टी ने नुबरा, लेह और कारगिल की तीन सीटों पर जीत का परचम लहराया था। इस बार लद्दाख के अलग केंद्र शासित प्रदेश बन जाने से यहां के उक्त चारों विधानसभा क्षेत्र जम्मू-कश्मीर से बाहर हो गए। उस चुनाव में कांग्रेस ने कश्मीर की चार सीटों में से सोपोर, बांदीपोरा, देवसर और शांगुस में जीत दर्ज की थी, जबकि जम्मू संभाग में पार्टी को इंद्रवल, बनिहाल, गुलाबगढ़, गूल अरनास और सुरनकोट की पांच सीटों पर जीत मिली थी। पार्टी ने कुल 867883 वोट हासिल किए थे, जो कुल मतों में से 18.01 प्रतिशत थे। लेकिन 2024 के विस चुनाव में पार्टी 682666 ही वोट हासिल कर पाई और यह मत प्रतिशत 11.97 प्रतिशत रहा। इस बार भाजपा को पछाड़ने के लिए कांग्रेस ने नेकां के साथ सीट गठबंधन किया था। इनमें 32 सीटों पर पार्टी लड़ रही थी और पांच पर दोनों दल मैदान में थे। इस बार कांग्रेस को कश्मीर संभाग से पांच सीटों में सफलता मिली है। इसमें बागूरा क्रीरी में इरफान हफीज लोन, बांदीपोरा में निजाम उद्दीन, सेंट्रल शाल्टेंग से प्रदेशाध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा, अनंतनाग से पीरजादा मोहम्मद सईद और डूरू से पूर्व प्रदेशाध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने जीत हासिल की है, जबकि जम्मू संभाग से पार्टी को एकमात्र राजोरी सीट पर सफलता मिली है। इस सीट से इफ्तिकार अहमद ने जीत दर्ज की। पार्टी बनिहाल ने अपनी सीट को बचा नहीं पाई। 2014 में इस सीट से पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष विकार रसूल वानी ने जीत दर्ज की थी। 2014 में कांग्रेस ने सुरनकोट से भी जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार इस सीट को गठबंधन में नेकां के लिए छोड़ दिया गया, जिसका पार्टी के भीतर विरोध हुआ था। इसी तरह जम्मू नार्थ की सीट को भी नेकां को देने पर विरोध स्वर उभरे थे।
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जम्मू कश्मीर के विस चुनावों में कांग्रेस द्वारा जीतीं सीटें
2024-6
2014-12
2008-17
1996-7
1987-26
1983-26
1977-11
1972-58
1967-61
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वोट प्रतिशत-2024-11.97, सीटें 6
2014- 18.01, सीटें 12

बनिहाल की सीट नेकां छोड़ती तो कांग्रेस का बढ़ जाता आंकड़ा
सीट गठबंधन में पांच सीटों पर नेकां और कांग्रेस दोनों के उम्मीदवारों को उतारा गया था। इसमें एक प्रतिष्ठित बनिहाल की सीट भी थी। इस सीट से कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष विकार रसूल वानी ने 2014 के चुनाव में जीत दर्ज की थी। लेकिन सीट गठबंधन के दौरान नेकां के साथ इस सीट पर सहमति नहीं बन पाई थी। अगर नेकां यह सीट कांग्रेस के लिए छोड़ देती तो सौ प्रतिशत कांग्रेस की जीत पक्की थी। इस सीट पर दोनों दलों के उम्मीदवारों के लड़ने से दोनों के मतदाता आपस में बंट गए। जिससे कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा। इसमें नेकां के सज्जाद शाहीन ने 33128 वोट लेकर जीत दर्ज कर ली, जबकि कांग्रेस के विकार रसूल वानी 20458 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें हार देखनी पड़ी।

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सीटें कम आने पर मंथन कर रहे, समीक्षा करेंगे-सोलंकी
पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में खराब प्रदर्शन पर जम्मू कश्मीर कांग्रेस के प्रभारी भरत सिंह सोलंकी का कहना है कि हम कम सीटें आने पर मंथन कर रहे हैं और इसकी समीक्षा की जाएगी। पार्टी की शीघ्र बैठक होने वाली है। जिसमें अगली रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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अवैध ढंग से भाजपा ने वोटरों को लुभाया : भल्ला
पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष एवं आरएस पुरा-जम्मू दक्षिण से हारे रमण भल्ला का आरोप है कि भाजपा ने अवैध ढंग से वोटरों को लुभाने का काम किया। अवैध तरीके से पैसे, कपड़ों, राशन, शराब आदि का लोगों में वितरण किया गया। हम लोगों के फैसले को सम्मान देते हैं और हमारा संघर्ष जारी रहेगा।
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